स्वतंत्र बोल
रायपुर 18 मार्च 2026. बेरोजगार महिलाओ को नौकरी लगाने के नाम पर लाखो की ठगी करने वाली महिला बाल विकास की सीडीपीओ पर विभागीय अधिकारी मेहरबान रहे। अक्टूबर 2025 में दुर्ग कोटवाली मे अपराध दर्ज होने के बाद बजाये सस्पेंड करने जाँच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। दुर्ग में ठगी करने सीडीपीओ रचिता नायडू का ट्रासंफर राजधानी से सटे अभनपुर परियोजना में पोस्टिंग दी गई। दुर्ग के स्थानीय मीडिया में खबरे आने के बाद संचालक महिला बाल विकास ने कलेक्टर दुर्ग से पुरे प्रकरण पर रिपोर्ट मांगा तो कलेक्टर दुर्ग ने जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्ग से। जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्ग राजकुमार जाम्बुलकर ने जिला महिला बाल विकास अधिकारी अजय साहू को जाँच का जिम्मा सौप कर निश्चिन्त हो गए, जिसका नतीजा हुआ कि पांच महीने बाद भी जाँच पूरी नहीं हो पाई है। जाँच अधिकारी अभी कथन बयान में अटके हुए है।

उधर की दुर्ग कोतवाली पुलिस ने अपराध दर्ज होने के बाद आवेदकों से बयान लिया, पर रचिता नायडू की गिरफ्तारी नहीं हुई। दुर्ग पुलिस के अधिकारी स्थानीय मीडिया को रचिता के फरार होने और ढूंढे नहीं मिलने की जानकारी देते रहे,, तब वह राजधानी में आराम से नौकरी करती रही। विभाग से जुड़े लोगो के अनुसार रचिता को प्रशासनिक अधिकारियो का संरक्षण था, जिसके चलते दुर्ग पुलिस रचिता को गिरफ्तार नहीं कर पाई। पीड़ितों के अनुसार पुलिस के अधिकारी पीड़ितों को ही समझाने में जुटे रहे। इस केस के संबंध में पुलिस अधिकारी ज्यादा जानकारी देने से बच है, दुर्ग कोतवाली एसएचओ प्रवीण राजपूत ने स्वतंत्र बोल से फोन पर हुई बातचीत मे सिर्फ बताया की ‘”जांच पूरी हो गई है, जल्द ही चालान पेश किया जायेगा।”
कलेक्टर के साथ फोटो सेशन –

रचिता नायडू की बेहतर काम करने रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने 15 अगस्त को सम्मानित किया, जिसका फोटो सोशल मीडिया में वायरल होने पर रचिता को जमकर बधाइयाँ मिली। बाद में मतदाता सूचि सर्वेक्षण (SIR) में बेहतर काम करने वाले बीएलओ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ को रायपुर कलेक्टर ने सम्मानित किया तो भी कलेक्टर के बराबर कुर्सी में रचिता बैठी नजर आई। जिस खबर को जनसंपर्क विभाग द्वारा 25 नवंबर 2025 को जारी किया था। इस दौरान कलेक्टर गौरव सिंह को रचिता के ठगी प्रकरण की जानकारी थी या नहीं,,अनुत्तरित प्रश्न है. यह वही समय है जब दुर्ग पुलिस को रचिता ढूंढे नहीं मिल रही थी।


