स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 9 अक्टूबर 2026: बिलासपुर हाईकोर्ट ने घर के पीछे 425 गांजे के पौधे मिलने के 21 साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी की सजा रद्द कर दी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल घर के पीछे पौधे मिल जाना आरोपी द्वारा गांजे की खेती किए जाने का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा खेती साबित न कर पाने के आधार पर आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया.
2004 में पुलिस ने जब्त किए थे मक्के के बीच उगे 425 पौधे
मामला 21 अगस्त 2004 का है, जब पसान थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि चत्तर सिंह ने अपने घर के पीछे मक्के की फसल के बीच गांजे के पौधे लगा रखे हैं. पुलिस ने मौके पर दबिश देकर 425 पौधे जब्त किए थे और जांच में गांजा की पुष्टि होने पर केस दर्ज किया था. इसके बाद अतिरिक्त सत्र एवं विशेष न्यायाधीश, कोरबा ने 28 जनवरी 2005 को आरोपी को 4 साल के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी.
जमीन के मालिकाना हक पर फंसे अभियोजन के दावे
आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि अभियोजन यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि जमीन पर आरोपी का अकेला कब्जा था. सुनवाई के दौरान सामने आया कि जिस खसरा नंबर 74/1 में पौधे मिले, उसके असली मालिक आरोपी के जीवित पिता सुखराम थे. भाइयों के बीच जमीन का कोई औपचारिक बंटवारा भी नहीं हुआ था. इसके अलावा स्वतंत्र गवाहों और कोटवार ने भी आरोपी द्वारा खेती किए जाने की बात से इनकार किया था.
‘प्राकृतिक रूप से भी उग सकते हैं पौधे’ -हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा कि गांजे के पौधे मिलना ही काफी नहीं है, बल्कि यह साबित करना अनिवार्य है कि आरोपी ने खुद उन्हें लगाया और उनकी देखभाल की. कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे पौधे प्राकृतिक रूप से भी उग सकते हैं. गांजे की खेती किए जाने का मूल तथ्य साबित न होने के कारण हाईकोर्ट ने 2005 में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर अपील स्वीकार कर ली.


