संघर्ष, गरीबी और मेहनत के बीच मंजू बहन ने लिखी ऐसी कहानी, जिसे सुन खुद मुख्यमंत्री भी हुए भावुक

स्वतंत्र बोल
रायपुर, 16 मई 2026: सुशासन तिहार के दौरान कोरबा जिले के दूरस्थ ग्राम लेमरू में उस वक्त भावुक और प्रेरणादायक माहौल बन गया, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय अचानक एक छोटे से गुपचुप स्टॉल पर पहुंच गए। वहां खड़ी महिला की कहानी सुनकर कुछ देर के लिए पूरा माहौल बदल गया। संघर्ष और आत्मनिर्भरता की यह कहानी अब इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।

दरअसल, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने लेमरू प्रवास के दौरान ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी लखपति दीदी श्रीमती मंजू के स्टॉल पर पहुंचकर उनके हाथों से बने गुपचुप का स्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंजू बहन से आत्मीय बातचीत की और उनकी जिंदगी के संघर्षों के बारे में जाना।

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बातचीत में मंजू बहन ने बताया कि उन्होंने बेहद छोटे स्तर से गुपचुप स्टॉल शुरू किया था। शुरुआत में आमदनी बहुत कम थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दिन-रात मेहनत और बचत के दम पर आज वे भवन निर्माण में उपयोग होने वाली ‘सेंटरिंग प्लेट’ के व्यवसाय से भी जुड़ चुकी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद मंजू ने अपने हौसले से ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसने आसपास की महिलाओं के लिए नई उम्मीद जगा दी।

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मुख्यमंत्री श्री साय ने मंजू बहन की मेहनत और आत्मविश्वास की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना आज हजारों महिलाओं के लिए सम्मान, आत्मविश्वास और नई जिंदगी का आधार बनती जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मंजू बहन को लखपति दीदी योजना के तहत 30 हजार रुपये का प्रोत्साहन चेक भी सौंपा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब मेहनत को सही अवसर मिलता है, तब बदलाव सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गांव और समाज की तस्वीर बदलने लगती है।

लेमरू में मुख्यमंत्री और मंजू बहन के बीच हुई यह मुलाकात अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव की महिलाओं में भी इसे लेकर नया उत्साह देखने को मिल रहा है।