स्वतंत्र बोल
नैनीताल 7 अक्टूबर 2026: कैंची धाम में पिछले वीकेंड 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने के बाद भवाली-अल्मोड़ा हाईवे और मंदिर परिसर में यातायात व सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बन गया. इसे देखते हुए कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव सामने आया है. प्रशासन अब भीड़ आने के बाद इंतजाम करने के बजाय पहले से संख्या का अनुमान लगाने की स्थायी व्यवस्था बनाने में जुट गया है. डीएम और एसएसपी की ओर से शासन को इस संबंध में जल्द ही संयुक्त सिफारिश भेजी जाएगी.
20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की तय हो सकती है सीमा
बैठक में धाम में रोजाना पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए 20 से 25 हजार की संख्या को मैनेजेबल कैप के तौर पर रखने पर चर्चा हुई. हालांकि, इसे अंतिम सीमा नहीं माना गया है और भविष्य की व्यवस्थाओं के आधार पर इसमें बदलाव हो सकता है. इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य भीड़ को रोकना नहीं, बल्कि भवाली-अल्मोड़ा हाईवे पर यातायात सुचारू रखना है. यह हाईवे बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय क्षेत्रों के लिए भी मुख्य मार्ग है.
मंदिर परिसर में एंट्री और एग्जिट के अलग होंगे रास्ते
मंदिर में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिहाज से प्रवेश और निकास के रास्ते अलग-अलग बनाए जाएंगे. कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने बताया कि एक ही रास्ते से आवाजाही होने पर आमने-सामने की भीड़ का दबाव बढ़ता है. रास्ते अलग होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सहूलियत होगी और किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा.
अब हर वीकेंड से पहले होगी क्राउड मैनेजमेंट बैठक
आगामी दिनों में कैंची धाम में सिर्फ बड़े आयोजनों पर ही प्रशासनिक बैठकें नहीं होंगी, बल्कि हर वीकेंड से पहले एसडीएम, सीओ और एआरटीओ स्तर पर समीक्षा बैठक की जाएगी. इसमें संभावित भीड़ के अनुसार शटल बसों की व्यवस्था, पार्किंग की स्थिति और रूट डायवर्जन पर फैसला होगा. भीड़ बढ़ने पर भवाली और आसपास के क्षेत्रों से केएमओयू और परिवहन विभाग के सहयोग से शटल सेवाएं चलाई जाएंगी.
बिना होटल बुकिंग पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ सकती है परेशानी
प्रशासन ने कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं से पहले से होटल या होमस्टे बुक कराकर ही आने की अपील की है. कमरे की तलाश में सड़कों पर घूमने वाले वाहनों से ट्रैफिक जाम की समस्या होती है. इसके अलावा, बाइक टैक्सी के अवैध कमर्शियल इस्तेमाल पर सख्ती के निर्देश दिए गए हैं. दुकानों और होटलों में रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि श्रद्धालुओं से मनमाने दाम वसूलने पर कार्रवाई की जा सके.
शिप्रा नदी की पवित्रता पर रहेगी विशेष नजर
बाबा नीम करौली के चमत्कारी प्रसंगों से जुड़ी शिप्रा नदी में पिकनिक मनाने और स्नान करने वालों पर अब वन विभाग की टीम निगरानी रखेगी. पौराणिक मान्यता है कि एक बार भंडारे में घी खत्म होने पर बाबा के कहने पर शिप्रा नदी का पानी कढ़ाई में डालते ही घी बन गया था. नदी की इसी धार्मिक आस्था और पवित्रता को बनाए रखने के लिए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की गई है.


