स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 6 अक्टूबर 2026 :पंचायत कर्मचारियों की पेंशन से जुड़ी याचिकाओं पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता पेंशन पाने का कोई वैधानिक अधिकार स्थापित नहीं कर सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत कर्मचारी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और उनकी सेवा संबंधी शर्तें अलग नियमों से संचालित होती हैं।
मामला प्रदेश के अलग-अलग जनपद पंचायतों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं ने लंबे समय तक सेवा करने और कुछ अन्य जनपद पंचायतों में कर्मचारियों को पेंशन मिलने का हवाला दिया था। इसी आधार पर उन्होंने अपने लिए भी पेंशन की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि कुछ जनपद पंचायतों की ओर से अपने स्तर पर पेंशन दिए जाने से सभी पंचायत कर्मचारियों को वैधानिक रूप से पेंशन पाने का अधिकार नहीं मिल जाता। किसी दूसरे प्राधिकरण की ओर से दिए गए लाभ के आधार पर वैधानिक अधिकार की मांग नहीं की जा सकती।
धारा 131 को लेकर कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 131 का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान पहले से मौजूद वेतन, भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभों को संरक्षण देता है। इससे नई पेंशन का अधिकार पैदा नहीं होता। कोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं की सेवा शर्तों में सेवानिवृत्ति लाभ प्रोविडेंट फंड योजना के तहत थे। वे कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड का लाभ ले रहे थे। ऐसे में उनके लिए पेंशन देने का कोई आधार नहीं बनता।
सभी याचिकाएं खारिज
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पेंशन पाने का वैधानिक अधिकार स्थापित नहीं कर सके। सभी याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं पाए जाने पर कोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया। कोर्ट ने मामले में लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया।


