34 साल पुरानी FIR पर हाईकोर्ट सख्त… 3 DSP पर कार्रवाई क्यों नहीं? DGP से तलब किया जवाब

स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 01 जुलाई 2026:
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 34 साल पुराने एक आपराधिक मामले की जांच में कथित लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। तीन डीएसपी स्तर के अधिकारियों के खिलाफ अब तक अंतिम कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) से शपथ पत्र के जरिए जवाब मांगा है। साथ ही याचिकाकर्ता को पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट को अलग से कानूनी चुनौती देने की अनुमति भी दी है।

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यह मामला वर्ष 1992 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई निर्धारित की है।

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दरअसल, याचिकाकर्ता मनोहरलाल चौधरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 34 साल पुरानी एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी। इस दौरान पुलिस विभाग की आंतरिक जांच में विवेचना से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आने के बाद तीन डीएसपी रैंक के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे थे।

इससे पहले 17 जून 2026 को हाईकोर्ट ने डीजीपी से इन अधिकारियों के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि डीजीपी ने 12 जून 2026 को राज्य सरकार को अनुशंसा भेजी थी, जिसमें तीनों अधिकारियों के खिलाफ लघु दंड (माइनर पेनाल्टी) देने की सिफारिश की गई है। यह प्रस्ताव फिलहाल गृह विभाग के विचाराधीन है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि जब उन्होंने एफआईआर रद्द करने की याचिका दायर की थी, तब मामला जांच के चरण में था। अब पुलिस ने विवेचना पूरी कर उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश कर दी है। इस पर उन्होंने नई चार्जशीट को कानून के तहत चुनौती देने की अनुमति मांगी।

डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता की मांग स्वीकार करते हुए उन्हें चार्जशीट के खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता प्रदान की। साथ ही डीजीपी को नया शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि 12 जून 2026 की अनुशंसा के बाद तीनों डीएसपी के खिलाफ अब तक क्या अंतिम कार्रवाई की गई है।

अब इस मामले पर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी, जिसमें डीजीपी की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र पर भी विचार किया जाएगा।