इंडिया ब्लॉक का चेहरा कौन? टीएस सिंहदेव ने दिया बड़ा बयान, राहुल गांधी को लेकर भी कही अहम बात

स्वतंत्र बोल
अंबिकापुर 16 जून 2026 : छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीएस सिंहदेव ने इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा, इसका निर्णय किसी एक नेता या राजनीतिक दल द्वारा नहीं बल्कि इंडिया ब्लॉक में शामिल सभी सहयोगी दलों की सामूहिक सहमति से होना चाहिए।

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अंबिकापुर में मीडिया से चर्चा के दौरान टीएस सिंहदेव ने कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति या पद का सवाल नहीं है, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में गठबंधन के नेतृत्व को लेकर सभी घटक दलों को साथ बैठकर निर्णय लेना चाहिए।

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राहुल गांधी के संदर्भ में बोलते हुए सिंहदेव ने उनकी कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कभी भी किसी पद या नेतृत्व की भूमिका हासिल करने के लिए स्वयं पहल नहीं की है। वे लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रक्रियाओं का सम्मान करते हैं तथा कई अवसरों पर ऐसी परिस्थितियों में भी आगे नहीं आए, जहां उनसे पहल की अपेक्षा की जा रही थी।

टीएस सिंहदेव ने कहा कि नेतृत्व चाहे राहुल गांधी को मिले, कांग्रेस को मिले या गठबंधन के किसी अन्य नेता को, इसका फैसला लोकतांत्रिक तरीके से सभी सहयोगी दलों की सहमति से होना चाहिए। यही गठबंधन की मजबूती और एकजुटता के लिए आवश्यक है।

इस दौरान उन्होंने राम जन्मभूमि दान मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस मुद्दे को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए कहा कि भगवान राम से जुड़े विषय करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़े हुए हैं।

सिंहदेव ने कहा कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और आस्था को ध्यान में रखकर आया था। ऐसे में यदि दान राशि या उससे जुड़े किसी मामले में भ्रष्टाचार अथवा अनियमितता के आरोप सामने आते हैं, तो यह लोगों के विश्वास को प्रभावित करने वाला विषय है।

उन्होंने तिरुपति लड्डू विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक संस्थानों और आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या से जुड़े इस मामले की निष्पक्ष, गहन और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनके अनुसार यह केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि देश की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है, इसलिए इसकी जांच निष्पक्ष तरीके से होना देशहित में आवश्यक है।