अब मेडिकल स्टोर से सीधे नहीं मिलेगी खांसी की दवा, मोदी सरकार का बड़ा फैसला लागू

स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 16 जून 2026 :  देशभर में कफ सिरप और अन्य औषधीय सिरप की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब मेडिकल स्टोर से खांसी की दवा या अन्य सिरप बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं खरीदे जा सकेंगे। केंद्र सरकार ने इन दवाओं की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर रोक लगाते हुए नियमों में संशोधन लागू कर दिया है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किए गए इस संशोधन के तहत ड्रग्स रूल्स, 1945 में बदलाव किया गया है। सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य दवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनके दुरुपयोग पर रोक लगाना बताया जा रहा है।

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अब तक ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल-K के अंतर्गत कुछ सामान्य और घरेलू उपयोग की दवाओं को बिना डॉक्टर की पर्ची के बेचने की अनुमति थी। इस सूची में सिरप, टैबलेट, पिल्स और लोजेंज जैसी श्रेणियां शामिल थीं। लेकिन नए संशोधन के बाद “सिरप” शब्द को इस सूची से हटा दिया गया है, जिससे इस श्रेणी को मिली सभी नियामकीय छूट समाप्त हो गई है।

इस फैसले के बाद यदि किसी व्यक्ति को खांसी, जुकाम या अन्य बीमारी के लिए कफ सिरप की आवश्यकता होगी, तो उसे किसी पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी वैध प्रिस्क्रिप्शन प्रस्तुत करना होगा। अब केमिस्ट और फार्मासिस्ट बिना डॉक्टर की सलाह के सिरप नहीं बेच सकेंगे।

सरकार के इस निर्णय के पीछे सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं भी बताई जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश और विदेश में भारतीय कफ सिरप को लेकर कई विवाद सामने आए थे। कुछ मामलों में दूषित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत तक हुई थी। जांच में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) जैसे जहरीले रसायनों की मौजूदगी सामने आई थी, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं।

इन घटनाओं के बाद भारतीय दवा उद्योग और कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी कुछ भारतीय सिरप को लेकर चेतावनी जारी की थी, जिसके बाद सरकार ने निगरानी और नियमन को और सख्त करने का निर्णय लिया।

जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को इस संबंध में मसौदा अधिसूचना जारी कर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे थे। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद अब अंतिम संशोधन लागू कर दिया गया है।

सरकार का मानना है कि इस कदम से दवाओं के अनियंत्रित उपयोग, गलत सेवन और संभावित दुष्प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही उचित दवा उपलब्ध हो सकेगी।

नए नियम लागू होने के बाद देशभर के मेडिकल स्टोर्स और फार्मासिस्टों को भी निर्धारित प्रावधानों का पालन करना होगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मरीजों की सुरक्षा और दवा वितरण प्रणाली को अधिक जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।