स्वतंत्र बोल
रायपुर 16 जून 2026 : छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं को पुनः स्थापित करने की राज्य सरकार की पहल को लेकर संत समाज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अभिनंदन किया है। राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थाओं के संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री से सौजन्य भेंट कर इस निर्णय का स्वागत किया और इसे नई पीढ़ी के संस्कार निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस मुलाकात के दौरान दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार के उदय लाल जी तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के देवकर साहब जी उपस्थित रहे। संतों ने विद्यालयों में भारतीय संस्कृति से जुड़े पारंपरिक श्लोकों, मंत्रों और प्रार्थनाओं को पुनः शामिल करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
संत-महात्माओं ने कहा कि एक समय विद्यालयों में “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर” जैसे मंत्रों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिकता और जीवन मूल्यों का विकास किया जाता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक व्यवस्था से दूर होती चली गईं, लेकिन अब राज्य सरकार की पहल से इन्हें फिर से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
संत समाज का मानना है कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र और अन्य प्रेरणादायी वैदिक प्रार्थनाओं का समावेश विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों का भी मार्गदर्शन मिलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा केवल पाठ्य ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण, संस्कारों और जीवन मूल्यों के विकास का भी आधार है। राज्य सरकार आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से बच्चों को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र और अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जागरूकता का विकास होगा। इससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ते हुए एक जिम्मेदार, जागरूक और संस्कारित नागरिक के रूप में विकसित हो सकेगी।
संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए आशीर्वाद प्रदान किया और कहा कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान तथा आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।


