स्वतंत्र बोल
रायपुर 05 जून 2026: छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा बदलाव शुरू होने जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में लाखों युवाओं की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है। अब केवल डिग्री हासिल करना ही सफलता का पैमाना नहीं होगा, बल्कि छात्रों को वैश्विक स्तर के कौशल, आधुनिक तकनीक और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से लैस किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई ‘उत्कृष्टता केंद्र (Center of Excellence)’ योजना को इसी बड़े परिवर्तन की आधारशिला माना जा रहा है।
खनिज संपदा, वन और सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचाने जाने वाला छत्तीसगढ़ अब खुद को एक ‘नॉलेज स्टेट’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सरकार का मानना है कि भविष्य उसी समाज का होगा जिसके पास ज्ञान, नवाचार और तकनीकी दक्षता होगी।
डिग्री तो मिल रही थी, लेकिन नौकरी क्यों नहीं?
लंबे समय से उच्च शिक्षा संस्थानों में सैद्धांतिक पढ़ाई और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और आधुनिक आईटी स्किल्स की मांग बढ़ती गई, लेकिन बड़ी संख्या में छात्र इन क्षेत्रों की व्यावहारिक जानकारी से दूर रहे। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवाओं पर पड़ा।
इसी चुनौती को अवसर में बदलने के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना का निर्णय लिया है।
करोड़ों की लागत से बदलेगी कॉलेजों की तस्वीर
योजना के तहत राज्य के 36 प्रमुख महाविद्यालयों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। शुरुआती चरण में 25 कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं अगले चरण में चयनित संस्थानों को 15 करोड़ रुपये तक की विशेष वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इसके अलावा ‘राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना’ के माध्यम से शिक्षकों और छात्रों को शोध और नवाचार के लिए वित्तीय एवं प्रशासनिक सहयोग भी मिलेगा।
पांच स्तंभों पर खड़ा होगा नया शिक्षा मॉडल
सरकार द्वारा विकसित किए जा रहे उत्कृष्टता केंद्र केवल भवन या बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रहेंगे। इनका पूरा ढांचा पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा।
पहला, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं जहां विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, कृषि और तकनीकी विषयों की आधुनिक लैब स्थापित की जाएंगी।
दूसरा, डिजिटल लर्निंग सेंटर जहां हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और ई-लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
तीसरा, रिसर्च एवं इनोवेशन लैब, जहां स्थानीय समस्याओं और संसाधनों पर शोध को बढ़ावा मिलेगा।
चौथा, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, जिसके तहत कोडिंग, आईटी स्किल्स, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
पांचवां, करियर एवं प्लेसमेंट गाइडेंस, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के लिए व्यवस्थित मार्गदर्शन उपलब्ध होगा।
गांव के छात्र भी पाएंगे विश्वस्तरीय सुविधाएं
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका लाभ सीधे छात्रों तक पहुंचेगा। चयनित कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को इन आधुनिक सुविधाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र जटिल प्रक्रियाओं में न उलझें और उन्हें सरल व पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से सभी सुविधाएं मिल सकें।
क्या रुक जाएगा युवाओं का पलायन?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छात्रों को अपने ही जिले में राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलने लगेंगी तो बड़े शहरों की ओर होने वाला शैक्षणिक पलायन काफी हद तक कम हो सकता है। इससे न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर स्टार्टअप, उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिभा से भरपूर हैं। उन्हें यदि सही संसाधन, आधुनिक तकनीक और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बन सकते हैं।
बदल सकती है छत्तीसगढ़ की पहचान
‘उत्कृष्टता केंद्र योजना’ को राज्य के शैक्षणिक इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यही केंद्र ऐसे युवाओं को तैयार करेंगे जो केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष, नवाचारी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह तैयार होंगे। यही वजह है कि इस योजना को विकसित छत्तीसगढ़ के नए विजन का आधार माना जा रहा है।


