40 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया BEO ऑफिस का कर्मचारी! गिरफ्तारी के बाद तत्काल सस्पेंड, शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

स्वतंत्र बोल
कोरबा/बिलासपुर 31 मई 2026: भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की बड़ी कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

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मामला सामने आते ही विभागीय स्तर पर भी सख्त रुख अपनाया गया और आरोपी कर्मचारी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई।

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40 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तारी

कार्यालय उप पुलिस अधीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), बिलासपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार एसीबी/ईओडब्ल्यू इकाई बिलासपुर ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के तहत दर्ज अपराध क्रमांक 0/2026 में कार्रवाई करते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा को 29 मई 2026 को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

बताया गया कि आरोपी कर्मचारी प्रार्थी अमृत बघेल से 40 हजार रुपये की रिश्वत ले रहा था, तभी एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर उसे पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद भेजा गया जेल

एसीबी की कार्रवाई के बाद आरोपी प्रदीप मिश्रा को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद पूरे शिक्षा विभाग में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है और भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर विभागीय सतर्कता भी बढ़ गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने किया निलंबित

मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने आरोपी कर्मचारी के आचरण को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत माना। इसके बाद प्रदीप मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया।

कटघोरा बनाया गया मुख्यालय

निलंबन अवधि के दौरान प्रदीप मिश्रा का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कटघोरा निर्धारित किया गया है। शासन के नियमों के अनुसार उन्हें इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

रिश्वतखोरी के मामले में हुई यह कार्रवाई सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश मानी जा रही है। एसीबी की कार्रवाई और उसके बाद विभागीय निलंबन से यह स्पष्ट संकेत मिला है कि भ्रष्टाचार के मामलों में प्रशासन किसी भी स्तर पर नरमी बरतने के मूड में नहीं है।