छत्तीसगढ़ में मुआवजा घोटाले पर बड़ी कार्रवाई, 8 ठिकानों से लाखों की नकदी, 37 किलो से ज्यादा चांदी और अहम दस्तावेज जब्त, कई बड़े नाम रडार पर

स्वतंत्र बोल 
रायपुर 28 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़ा मुआवजा घोटाला अब धीरे-धीरे एक बड़े साजिशी खेल के रूप में सामने आ रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताजा कार्रवाई ने इस मामले में चौंकाने वाले खुलासों के संकेत दिए हैं। रायपुर, अभनपुर, धमतरी और कुरुद में एक साथ 8 ठिकानों पर हुई छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, चांदी और कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण के नाम पर मुआवजे में गड़बड़ी का यह खेल लंबे समय से चल रहा था। ED की टीम ने जब छापेमारी की, तो करीब 66.9 लाख रुपये नकद और 37 किलो से ज्यादा चांदी सामने आई। इसके अलावा कई डिजिटल डिवाइस और संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए गए, जो इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल सकते हैं।

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई ACB/EOW, रायपुर द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई। इस FIR में तत्कालीन SDO (राजस्व) निर्भय साहू समेत कई लोगों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी और जालसाजी के जरिए अवैध रूप से मुआवजा हासिल किया।

ED के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 28 अप्रैल 2026 को PMLA, 2002 की धारा 17 के तहत यह तलाशी अभियान चलाया। जांच में सामने आया कि रायपुर-विशाखापत्तनम राजमार्ग परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3A के तहत अधिसूचना जारी होने के बाद भी जमीन का स्वामित्व जानबूझकर ट्रांसफर किया। इतना ही नहीं, धारा 3D की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया, ताकि मुआवजा कई गुना बढ़ाया जा सके।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि हेराफेरी किए गए खसरा अभिलेखों के आधार पर मुआवजा स्वीकृत और वितरित किया गया। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों ने इस पूरी प्रक्रिया से अवैध लाभ उठाया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह अतिरिक्त मुआवजा ‘अपराध की आय’ की श्रेणी में आता है।

इस कार्रवाई के बाद अब कई और नाम जांच के दायरे में आ सकते हैं। ED को उम्मीद है कि जब्त किए गए डिजिटल उपकरण और दस्तावेज इस पूरे घोटाले के पीछे छिपे बड़े नेटवर्क का खुलासा कर सकते हैं।

फिलहाल इस मामले में जांच जारी है, लेकिन जिस तरह से छापेमारी में संपत्ति और सबूत सामने आए हैं, उससे साफ है कि भारतमाला प्रोजेक्ट के नाम पर खेला गया यह घोटाला अभी और बड़े खुलासों की ओर बढ़ सकता है।