स्वतंत्र बोल
रायपुर 27 मई 2026: छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा अब तेजी से गरमाने लगा है। सेवा के दौरान किसी शासकीय कर्मचारी की मौत होने पर मिलने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने सरकार से मौजूदा व्यवस्था बदलने और अनुग्रह अनुदान बढ़ाने की मांग की है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, दुर्ग के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप यादव ने मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर दुर्ग के माध्यम से ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान में राज्य शासन के किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिवार को अधिकतम सिर्फ 50 हजार रुपये तक की अनुग्रह राशि देने का प्रावधान है।
संघ का कहना है कि अब प्रदेश के कर्मचारियों को सातवां वेतनमान मिल रहा है और महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इतनी कम राशि मृतक कर्मचारी के परिवार के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
कर्मचारी संघ ने इस मांग के समर्थन में मध्यप्रदेश सरकार के हालिया फैसले का हवाला दिया है। ज्ञापन में बताया गया कि मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग ने 3 अप्रैल 2025 को आदेश जारी कर सेवा के दौरान मृत शासकीय सेवकों के परिवार को अधिकतम 1 लाख 25 हजार रुपये तक अनुग्रह अनुदान देने का प्रावधान किया है।
संघ ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर हुआ था और समय-समय पर मध्यप्रदेश में कर्मचारियों के हित में लिए गए कई फैसले छत्तीसगढ़ में भी लागू किए जाते रहे हैं। इसी आधार पर अब छत्तीसगढ़ में भी अनुग्रह राशि बढ़ाने की मांग उठाई गई है।
ज्ञापन में मध्यप्रदेश री-ऑर्गनाइजेशन एक्ट 2000 के सेक्शन 61 का उल्लेख करते हुए सरकार से अनुरोध किया गया है कि सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को अधिकतम 1.25 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान स्वीकृत किया जाए।
इस मांग के सामने आने के बाद अब सरकारी कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि अचानक होने वाली मौत के बाद परिवार आर्थिक संकट में घिर जाता है, ऐसे में अनुग्रह राशि बढ़ना बड़ी राहत साबित हो सकता है।


