मौत के मुहाने पर था 10 महीने का मासूम, कई अस्पतालों ने खड़े कर दिए हाथ… फिर रायपुर एम्स में हुआ ऐसा चमत्कार जिसने सबको चौंका दिया

स्वतंत्र बोल
रायपुर, 24 मई 2026:  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने चिकित्सा जगत को भी हैरान कर दिया। 10 महीने का एक मासूम, जिसकी जिंदगी लगभग खत्म मानी जा रही थी, उसे रायपुर एम्स के डॉक्टरों ने मौत के मुंह से वापस खींच लिया। बच्चे को एक ऐसी दुर्लभ और बेहद खतरनाक जन्मजात हृदय बीमारी थी, जिसका नाम सुनकर ही कई बड़े स्वास्थ्य संस्थानों ने इलाज करने से इनकार कर दिया था।

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मासूम ‘एएलसीएपीए’ यानी एनॉमलस लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी फ्रॉम द पल्मोनरी आर्टरी नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित था। यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि करीब 3 लाख नवजात शिशुओं में से केवल एक को ही होती है। रायपुर जिले के रहने वाले इस बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और परिवार उम्मीद लगभग छोड़ चुका था।

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कई अस्पतालों से निराशा मिलने के बाद बच्चे को रायपुर एम्स रेफर किया गया। यहां डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने चुनौती स्वीकार की और एक बेहद जटिल हृदय सर्जरी को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी, कार्डियोलॉजी, कार्डियक एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी और पीडियाट्रिक्स विभाग के डॉक्टर शामिल रहे।

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नाइक ने बताया कि एएलसीएपीए जन्मजात हृदय रोगों में सबसे जटिल बीमारियों में गिनी जाती है। दुनिया के चुनिंदा मेडिकल सेंटर ही इस तरह के मामलों का सफल इलाज कर पाते हैं। यही वजह रही कि यह ऑपरेशन डॉक्टरों के लिए भी किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं था।

सर्जरी के दौरान और उसके बाद का समय सबसे ज्यादा खतरनाक माना जा रहा था। एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर की जिम्मेदारी डॉ. सुब्रत सिं्घा और उनकी टीम ने संभाली। ऑपरेशन के बाद शुरुआती 24 घंटे बेहद संवेदनशील रहे, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार बच्चे की निगरानी करती रही और उन्नत जीवन रक्षक सहायता दी गई।

आखिरकार डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई और मासूम की हालत में सुधार आने लगा। रायपुर एम्स की इस सफलता को बाल हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।