स्वतंत्र बोल
रायपुर 27 मई 2025. पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव शैलेन्द्र पटेल के फर्जीवाड़े और अयोग्यता पर उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा मुहर लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय के अधिकारियो और कर्मचारियों में ख़ुशी की लहर है। मई 2022 में तत्कालीन कुलपति केशरीलाल वर्मा ने शैलेन्द्र पटेल को प्रभारी कुलसचिव बनाया था, तब से वर्तमान तक प्रभारी कुलसचिव की जिम्मेदारी पटेल के पास है। पटेल ने इन तीन वर्षो में विश्वविद्यालय में भय और आतंक का माहौल बना रखा है, उसके आतंक से विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी, सप्लायर, छात्र संघ के पदाधिकारी और विश्वविद्यालय (एजुकेशन) बीट की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों में था।

विरोध करने वालो को पटेल एफआईआर कराने और जेल भेजने की धमकी देता था, अब जब उच्च न्यायालय ने उसकी अयोग्यता को प्रमाणित कर दिया तो कुर्सी बचाने फिर नेताओ, मंत्रियो और अधिकारियो के चक्कर लगा रहा है। पूर्व की कांग्रेस सरकार में कुर्सी परिक्रमा कर तो पटेल ने कुलसचिव की कुर्सी पर कब्जा जमाया था, अब एक बार फिर वही क्रम दोहराया जा रहा है। मंगलवार को विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष दिलीप धृतलहरे के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने कुलपति डॉ सच्चिदानंद शुक्ला को ज्ञापन सौपकर पटेल को प्रभारी कुलसचिव के पद से तत्काल हटाने की मांग की। पदाधिकारियों के अनुसार भ्रष्ट और अयोग्य व्यक्ति के कुलसचिव जैसे गरिमापूर्ण कुर्सी में बैठे रहने से विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हो रही है, इसक असर कर्मचारियों और अध्यययनरत छात्रों में हो रहा है। कुलपति को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, पटेल के नहीं हटने पर विध्वविद्यालय में धरना प्रदर्शन और नारेबाजी का दौर शुरू होगा।
कुलपति बने सरंक्षक-
विश्वविद्यालयिन कर्मियों और कार्यपरिषद सदस्यों के अनुसार कुलपति डॉ सच्चिदानंद शुक्ल शैलेन्द्र पटेल के सरंक्षक की भूमिका में है। बताते है कि डॉ शुक्ल ही पटेल को सत्ता के करीबी और बीजेपी के मातृसंगठन के पदाधिकारियों से भेंट मुलाकात करवा रहे है ताकि पटेल की कुर्सी सलामत रहे। जबकि पटेल को विशुद्ध रूप विरोधी पार्टी का विचारक और करीबी बताया जाता है। एबीवीपी द्वारा बीते वर्ष धरना प्रदर्शन करने पर एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष द्वारा पटेल के समर्थन में जारी बयान उसकी पुष्टि करता है।
अब समझने वाली बता है कि कुलपति डॉ शुक्ल दागी उपकुलसचिव पटेल को बचाने एड़ीचोटी का जोर क्यों लगाए हुए है।दरअसल उसेक पीछे की वजह एसी मेन्टेन्स, प्रिंटर, कंप्यूटर खरीदी, सुरक्षा गार्ड तैनाती, प्रश्न पत्र छपाई, दीक्षांत समारोह, नेक ग्रेडेशन, स्थापना दिवस और रंगरोगन व भवन निर्माण के नाम पर हुए भुगतानों में करोडो का बंदरबांट हुआ है। इसकी सूक्षम जाँच हो तो तीन सालो का दस करोड़ से अधिक का घपला फूटेगा। प्रभारी कुलसचिव अकेले ऐसा कर जाए संभव नहीं है, संभवतः यही वो कारण है जिसके लिए कुलपति डॉ शुक्ला पटेल को बचाने जोर-शोर से प्रयासरत है।
यहाँ यह जानना जरुरी है कुलपति डॉ शुक्ल भी कुलपति पद के लिए निर्धारित योग्यता को पूरा नहीं करते है। राजधानी के विद्वानो ने न्यायलय में याचिका दाखिल किया है, जो पेंडिंग है। भगवान् राम-कृपा से कुलपति बने डॉ शुक्ला की कुर्सी भी खतरे है, जिस दिन उच्च न्यायालय ने आदेश जारी हुआ तो उन्हें भी सरकारी बंगला और सरकारी गाडी छोड़ना होगा। कोर्ट में डॉ शुक्ला और पटेल दोनों के वकील नीरज चौबे है, जो विश्वविद्यालय के पेनल लॉयर है।
रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव की पीएचडी, एमफिल की डिग्री फर्जी…!




