स्वतंत्र बोल
रायपुर 03 मार्च 2025. जैतूसाव मठ में साल दर साल जमीनों का रकबा घटते जा रहा है। बीते कुछ वर्षो में मठ प्रबंधन की सैकड़ो एकड़ जमीन उनके रिकॉर्ड से गायब हो गई तो मठ को करोडो रुपये का नुकसान हुआ है। वर्तमान स्थिति ऐसी हो गई कि प्रबंधन अब न्यायालयीन लड़ाई लड़ने की जगह अब समझौता करना बेहतर समझ रहा है। मठ प्रबंधन अपनी जमीन और रुपयों को बचाने के प्रशासन से शिकायते करता रहा पर उन शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई।
आस्था का केंद्र प्राचीन रामचंद्र स्वामी जैतूसाव मठ की दतरेंगा की साढ़े 17 एकड़ जमीन मंदिर ट्रस्ट के हाथो से चली गई, जमीन विवाद सार्वजनिक होने पर अविनाश बिल्डर ने जमीन को खरीदने से इंकार करते हुए पैसा मठ प्रबंधन से वापस मांगा है, इस मामले में मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन उलझ गया है। मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन ने क़ानूनी लड़ाई लड़ने की बजाये किसान से समझौता करना बेहतर समझा और प्रस्ताव पारित कर दिया। अब बिल्डर द्वारा पैसा वापस मांगने पर मंदिर ट्रस्ट को पैसा लौटाना होगा, तो उस प्रस्ताव का क्या होगा ? यह एक सवाल बना हुआ है। उधर बीते कुछ वर्षो में अनेको ऐसे मामले आये है जिसमे मठ प्रबंधन को नुकसान हुआ है।
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करोडो के मुआवजा का नुकसान-
जैतूसाव मठ की उगेतरा की साढ़े 5 एकड़ जमीन भारत माला परियोजना में निकली। जमीन के बदले राजस्व अधिकारियो ने 2 करोड़ 37 लाख रुपये का मुआवजा घोषित किया। वह मुआवजा मंदिर ट्रस्ट को मिलता, उससे पहले उसमे खेला हो गया। जिस जमीन का मुआवजा मंदिर ट्रस्ट को मिलता, उसे उमा तिवारी नामक महिला ने अपना बताकर पूरा मुआवजा ले लिया। मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन ने इसकी शिकायत कलेक्टर और एसएसपी से की,, पर दो साल बाद भी 2 करोड़ 37 लाख रुपये का मुआवजा राशि मंदिर को वापस नहीं मिला। मंदिर ट्रस्ट के महेंद्र अग्रवाल अनुसार तत्कालीन एसडीएम अभनपुर निर्भय साहू, तत्कालीन तहसीलदार नवापारा, स्टाम्प वेंडर अशोक साहू, जमीन दलाल विजय जैन और उमा तिवारी नामक महिला ने सुनियोजित तरीके से मुआवजा हड़प लिया। दो सालो बाद भी मंदिर प्रबंधन उमा तिवारी की जानकारी नहीं जुटा पाया है।
धरमपुरा की जमीन बिक गई-
जैतूसाव मठ की धरमपुरा स्थित जमीनों पर भूमाफियाओ ने बलपूर्वक कब्ज़ा कर लिया तो रसूखदारों ने कौड़ियों के भाव खरीद रजिस्ट्री करा लिया। धरमपुरा में खसरा क्रमांक 284 रकबा 1.617 हेक्टेयर जमीन पर सोनूराम साय और सोनसाय साहू नामक किसानो के नाम से बिक गई, बाद में किसानो ने जमीन अन्य लोगो को बेच दी। इस जमीन के बिक्री को लेकर मठ के सचिव महेंद्र अग्रवाल ने साल 2019 में सिविल लाइन थाने में शिकायत किया था कि भूमाफियाओ द्वारा फर्जी तरीके से उक्त जमीन को सहमति पत्र तैयार बेचने का प्रयास किया जा रहा है, जिस पर कार्यवाही करे। मठ प्रबंधन की शिकायत पर कार्यवाही नहीं हुई, उल्टे 2023 में जमीन की रजिस्ट्री हो गई।
पाठशाला की जमीन पर कॉम्प्लेक्स-
जैतूसाव मठ के नवापारा स्थित संस्कृत पाठशाला की जमीन पर कमर्शियल काम्प्लेक्स बन गया है। पाठशाला में छोटे बच्चे पहले संस्कृत की शिक्षा लेते थे, अब वहा कॉमर्शियल काम्प्लेक्स बन गया है। बताते है कि पाठशाला को सवारने के नाम पर पहले जैतूसाव मठ में शिफ्ट किया गया फिर काम्प्लेक्स बनाकर बेच दिया गया। जहाँ पहले संस्कृत पाठशाला संचालित होती थी, अब वहा दुकाने सजी हुई है। इसमें मठ प्रबंधन के लोगो की संलिप्तता रही है।



