कथित मंत्री का कारनामा: बंधक जमीन को बेच दिया, अधिकारी बोले- बंधक जमीन को बेचना अपराध, क्या फर्जी पेपर्स तैयार कर बेची गई आमासिवनी की जमीन ?

स्वतंत्र बोल
रायपुर 10 फरवरी 2025.  लोक न्यास ग्राम सेवा समिति के जमीनों को सुनियोजित तरीके से ट्रस्ट के कथित पदाधिकारियों ने बेच डाला। जमीन बेचने से नाराज तात्कालिक अध्यक्ष गोकुलदास डागा ने आयोग से मंत्री की शिकायत किया था। दस्तावेजों अनुसार साल 2008 में आमासिवनी की साढ़े 19 एकड़ जमीन को बिल्डर अनूप अग्रवाल को बेचने के लिए गायत्री शर्मा नामक महिला को ग्राम सेवा समिति का अध्यक्ष बनाया गया था, श्री डागा की नाराजगी के बाद भी स्वयंभू मंत्री अजय तिवारी ने साढ़े 19 एकड़ जमीन बिल्डर अनूप अग्रवाल को बेच दिया। जिसकी शिकायत गोकुलदास डागा ने खादी ग्रामोद्योग आयोग से किया था। अनूप अग्रवाल रायपुर हॉस्पिटल के संचालक डॉ कमलेश्वर अग्रवाल के भाई बताये जाते है, तो गायत्री शर्मा कौन है यह स्पष्ट नहीं हुआ है।

अजय तिवारी

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उधर आमासिवनी की जिस जमीन को बिल्डर को बेचा गया, वह जमीन खादी ग्रामोद्योग आयोग में बंधक था। दस्तावेजों के अनुसार आयोग द्वारा ग्राम सेवा समिति के फूल चौक, पंडरी तराई, आमासिवनी और केसल (खरोरा) और बसना (महासमुंद) के जमीनों को बंधक रख करीब 1,95,76000 रुपये लोन स्वीकृत किया था। लोन देने के पूर्व आयोग ने ग्राम सेवा समिति के संबधित जमीनों के मूल पेपर्स बंधक रखा था। साल 2008 में ट्रस्ट के स्वयंभू मंत्री अजय तिवारी ने जमीन बेचने के पूर्व खादी ग्रामोद्योग आयोग से नहीं ली, ना ही जमीन बेचने की जानकारी दी। बिना अनुमति बंधक जमीनों का रजिस्ट्री करना धोखाधड़ी है। रजिस्ट्री बाद शिकायत होने पर आयोग को जमीं बिक्री की जानकारी हुई।

पेपर्स आयोग के पास तो रजिस्ट्री कैसे ?
खाड़ी ग्रामोद्योग आयोग के अधिकारियो के अनुसार लोन देने के दौरान आयोग सम्बन्धित जमीनों के मूल पेपर्स बंधक रखती है और लोन चुकाने के बाद पेपर्स लौटाती है। बंधक जमीनों को विशेष परिस्थिति में बेचने पर आयोग से नियमानुसार अनुमति लेना आवश्यक है, पर आमासिवनी प्रकरण में ऐसा नहीं किया गया। जिसके बाद सवाल उठता है की क्या फर्जी पेपर्स तैयार कर आमासिवनी के जमीन की रजिस्ट्री कराई गई ? शिकायत पर आयोग द्वारा जाँच समिति भी गठित की गई थी, हालाँकि जाँच में क्या हुआ स्पष्ट नहीं है।

चार वर्षो से आयोग का काम बंद-

कलेक्टर को ज्ञापन सौपने पहुंचे ग्राम सेवा समिति कर्मचारी

खादी ग्रामोद्योग से सम्बन्ध्ता पर संचालित ग्राम सेवा समिति का काम बीते चार वर्षो से बंद है। समिति में पहले बुनकरों दवरा सूत कपास काटने, साबुन बनाने सहित अन्य जीविकोपयोगी काम किये जाते थे। जिस पर आयोग द्वारा उत्पादित सामग्री को क्रय कर ग्रांट दिया जाता था, चार वर्षो से काम बंद होने से आयोग ने ग्रांट देना बंद कर दिया है तो बुनकरों के सामने आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है। उनके आवास पर चल रहे बुलडोजर और बिजली-पानी की समस्या से जूझते रहवासियों ने कुछ दिनों पहले कलेक्टर को कार्यवाही संबंधी ज्ञापन सौपा था।

 

संस्था को पसीने से सींचने वाले कर्मचारी पानी-बिजली को तरसे, भूमाफियाओ के दखल से उजड़ता ग्राम सेवा समिति का कुनबा..