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रायपुर, 29 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में इन दिनों एक ऐसी यात्रा सुर्खियों में है, जिसने आस्था, उत्साह और चर्चा—तीनों को एक साथ खड़ा कर दिया है। साय सरकार की ‘रामलला दर्शन योजना’ के तहत आज दुर्ग और राजनांदगांव रेलवे स्टेशन से 850 श्रद्धालु अयोध्या के लिए रवाना हुए, जहां पूरे माहौल में “जय श्री राम” के जयघोष गूंजते रहे।
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स्टेशन परिसर में सुबह से ही भक्तों और उनके परिजनों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। तिलक, पुष्पवर्षा और पारंपरिक लोकनृत्य के साथ श्रद्धालुओं को विदाई दी गई। यह दृश्य सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था के उत्सव जैसा नजर आया, जिसमें हर चेहरे पर खुशी और भावुकता साफ दिखाई दी।
इस मौके पर सांसद श्री संतोष पांडे, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री योगेश दत्त मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। दुर्ग स्टेशन पर महापौर अल्का बाघमारे ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। सभी ने इस योजना को सरकार की एक बड़ी जनकल्याणकारी पहल बताया, जो आस्था के साथ सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत कर रही है।
सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को अयोध्या में भगवान श्रीराम के दर्शन कराना है। इसके तहत यात्रियों को निःशुल्क यात्रा, भोजन, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अब तक 45 हजार 900 श्रद्धालु इस योजना का लाभ ले चुके हैं और इस नई खेप के साथ यह आंकड़ा 46 हजार 750 तक पहुंच जाएगा। खास बात यह है कि श्रद्धालुओं को अयोध्या के साथ काशी विश्वनाथ के भी दर्शन कराए जा रहे हैं।
यात्रा पर निकले कई श्रद्धालु भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर पाएंगे, लेकिन इस योजना ने उनका सपना साकार कर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल का आभार जताया।
यात्रा के दौरान सुरक्षा, भोजन, चिकित्सा और ठहरने की पूरी व्यवस्था की गई है। पर्यटन मंडल और आईआरसीटीसी के कर्मचारी यात्रियों के साथ रहकर हर सुविधा सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की परेशानी न हो।
लेकिन इस भव्य और भावनात्मक पहल के बीच एक सवाल भी धीरे-धीरे उभर रहा है—क्या यह योजना केवल आस्था को सशक्त करने का प्रयास है या इसके पीछे कोई व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संदेश भी छिपा है? फिलहाल, श्रद्धालुओं के लिए यह एक सपनों जैसी यात्रा जरूर बन गई है, लेकिन इसकी गूंज आने वाले समय में और दूर तक सुनाई दे सकती है।
