स्वतंत्र बोल
तिरुवनंतपुरम 08 जून 2026: सत्ता संभालते ही अपने करीबी रिश्तेदार को अहम पद सौंपना केरल के बिजली मंत्री सन्नी जोसेफ को भारी पड़ गया। मंत्री द्वारा अपने जीजा बेनी थॉमस को पर्सनल सेक्रेटरी नियुक्त किए जाने का मामला ऐसा तूल पकड़ गया कि आखिरकार विवाद बढ़ने पर बेनी थॉमस को इस्तीफा देना पड़ गया। इस घटनाक्रम ने केरल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और कांग्रेस सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है।
जीजा की नियुक्ति से शुरू हुआ बवाल
विवाद तब शुरू हुआ जब कन्नूर जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) के महासचिव और मंत्री सन्नी जोसेफ के रिश्तेदार बेनी थॉमस को अतिरिक्त निजी सचिव नियुक्त किया गया। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, विपक्ष ने इसे भाई-भतीजावाद का मामला बताते हुए सरकार पर हमला बोल दिया।
मामला सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी इस नियुक्ति को लेकर असहजता दिखाई देने लगी। पार्टी बैठकों में भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए गए।
बढ़ते दबाव के बीच देना पड़ा इस्तीफा
लगातार बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के बाद बेनी थॉमस ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया। इस्तीफे में उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी नियुक्ति को लेकर पैदा हुए विवाद से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि पार्टी को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए वह तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं।
मंत्री ने किया बचाव, बोले- रिश्तेदारी नहीं, काम के आधार पर मिली जिम्मेदारी
पूरे विवाद पर मंत्री सन्नी जोसेफ ने सफाई देते हुए कहा कि बेनी थॉमस की नियुक्ति पारिवारिक संबंधों के कारण नहीं बल्कि उनके सार्वजनिक जीवन और संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए की गई थी।
मंत्री ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान बेनी थॉमस ने उनके मुख्य चुनाव प्रतिनिधि के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि नियुक्ति स्थानीय कांग्रेस नेतृत्व की सिफारिश पर की गई थी।
विधानसभा तक पहुंचा मामला
मामले ने इतना राजनीतिक रंग पकड़ लिया कि इसकी गूंज विधानसभा तक सुनाई दी। विपक्षी CPI(M) नेताओं ने इसे भाई-भतीजावाद का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
विपक्ष का कहना है कि जो कांग्रेस विपक्ष में रहते हुए ऐसी नियुक्तियों का विरोध करती थी, वही सत्ता में आने के बाद अपने नेताओं और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचा रही है।
सवाल अभी भी कायम
भले ही बेनी थॉमस ने पद छोड़ दिया हो, लेकिन इस पूरे विवाद ने सरकार और कांग्रेस नेतृत्व को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक नियुक्ति का मामला था या फिर सत्ता के गलियारों में रिश्तों को तरजीह देने की बड़ी तस्वीर का हिस्सा?
फिलहाल इस्तीफे से विवाद शांत करने की कोशिश जरूर हुई है, लेकिन इस मुद्दे की राजनीतिक गूंज अभी थमती नजर नहीं आ रही।


