स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली, 19 मई 2026: देश में लगातार बढ़ रहे आवारा कुत्तों के हमलों और लोगों में बढ़ते डर के बीच आज सुप्रीम कोर्ट एक ऐसा फैसला सुनाने जा रहा है, जिसका असर हर शहर, हर गली और हर मोहल्ले पर पड़ सकता है। स्ट्रे डॉग्स को लेकर दायर कई अहम याचिकाओं पर मंगलवार 19 मई को सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने की थी।
कोर्ट ने सभी पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। उस दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों से एक हफ्ते के भीतर अपनी लिखित दलीलें जमा करने को कहा था।
दरअसल, मामला उन आदेशों से जुड़ा है जिनमें सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम भेजने और नसबंदी व टीकाकरण के बाद भी उन्हें वापस सड़क पर न छोड़ने की बात कही गई थी। इस आदेश के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं, केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI), पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, डॉग लवर्स और कुत्तों के हमलों के शिकार लोगों की ओर से जोरदार दलीलें दी गईं। कोर्ट ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।
गौरतलब है कि पिछले साल 11 अगस्त को जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में प्रशासन को सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम भेजने का निर्देश दिया था। अदालत ने साफ कहा था कि नसबंदी और वैक्सीनेशन के बाद भी कुत्तों को दोबारा सड़क पर नहीं छोड़ा जाएगा। इतना ही नहीं, इस अभियान में रुकावट डालने वालों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने उस वक्त सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह फैसला किसी भावना से नहीं, बल्कि जनहित और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है। कोर्ट ने जल्द से जल्द कार्रवाई करने पर जोर दिया था।
हालांकि बाद में कई संगठनों और पशु प्रेमियों ने इस आदेश को चुनौती दी। इसके बाद 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में बड़ा बदलाव करते हुए कहा कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। लेकिन रेबीज़ से संक्रमित और अत्यधिक आक्रामक कुत्तों को वापस छोड़ने पर रोक बरकरार रखी गई।
इसके साथ ही अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी सख्त रोक लगा दी थी। अब पूरे देश की नजर आज आने वाले उस फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों की किस्मत आखिर क्या होगी — शेल्टर हाउस या फिर दोबारा खुली सड़कें।


