स्वतंत्र बोल
रायपुर, 19 मई 2026: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डीएमएफ और शराब घोटाले मामले में जेल में बंद रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब 2 साल 28 दिन जेल में बिताने के बाद टुटेजा मंगलवार देर शाम जेल से बाहर आ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली, जिसके बाद प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल में हो रही देरी को जमानत का आधार माना। कोर्ट ने यह भी माना कि मामले में अभी 80 से ज्यादा गवाहों के बयान बाकी हैं, ऐसे में ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।
हालांकि सुप्रीम Court ने टुटेजा को राहत देते हुए कई सख्त शर्तें भी लगा दी हैं। आदेश के मुताबिक, जमानत पर रिहा होने के बाद अनिल टुटेजा छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे और किसी भी सेवारत सरकारी अधिकारी से संपर्क नहीं करेंगे। साथ ही उन्हें गवाहों को प्रभावित करने या जांच में हस्तक्षेप करने से भी साफ तौर पर रोका गया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने जमानत का जोरदार विरोध किया। सरकार की तरफ से दलील दी गई कि टुटेजा एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और बाहर आने पर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत मंजूर कर ली।
ईडी के अनुसार, यह कथित घोटाला साल 2019 से 2022 के बीच उस वक्त हुआ जब राज्य में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब नीति में हेरफेर कर एक संगठित सिंडिकेट के जरिए करीब 3 हजार करोड़ रुपए की अवैध कमाई की गई। ईडी की जांच में नौकरशाहों, राजनीतिक नेताओं और निजी कारोबारियों के गठजोड़ का भी खुलासा होने का दावा किया गया है।
अब टुटेजा की रिहाई के बाद इस हाई प्रोफाइल मामले में सियासी बयानबाजी और जांच की दिशा दोनों पर सबकी नजर टिकी हुई है।


