स्वतंत्र बोल
पटना07 मई 2026: बिहार की राजनीति में गुरुवार को उस समय बड़ा बदलाव देखने को मिला जब राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार किया गया और एक ही मंच पर कई बड़े नेताओं की मौजूदगी ने पूरे राजनीतिक माहौल को गरमा दिया।
इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसी दौरान बिहार की नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को औपचारिक रूप दिया गया।
सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा का केंद्र रहा पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे निशांत कुमार का मंत्री पद की शपथ लेना। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत में नई बहस को जन्म दे दिया है।
मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व में हुए इस विस्तार के पहले चरण में श्रवण कुमार, विजय कुमार सिन्हा, दिलीप कुमार जायसवाल, निशांत कुमार और लेशी सिंह ने मंत्री पद की शपथ ली।
इसके बाद दूसरे चरण में राम कृपाल यादव, नीतीश मिश्रा, दामोदर रावत, संजय सिंह ‘टाइगर’ और अशोक चौधरी सहित कई नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। तीसरे चरण में भगवान सिंह कुशवाहा, अरुण शंकर प्रसाद, मदन सहनी, संतोष कुमार सुमन और रमा निषाद जैसे नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।
कुल मिलाकर कई विधायकों को एक साथ मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली, जिससे यह विस्तार बिहार की राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा और चर्चित घटनाक्रम बन गया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फेरबदल सिर्फ मंत्रिमंडल विस्तार नहीं बल्कि सत्ता संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत है। पहले जहां उपमुख्यमंत्री पद पर भाजपा के नेता काबिज थे, वहीं अब नए समीकरणों के तहत स्थिति बदलती नजर आ रही है।
संविधान के अनुसार, 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में अधिकतम 36 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं, ऐसे में हर नया विस्तार राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना देता है।


