कैश की राख में छिपा सच? जले नोटों के साए में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा ने अचानक दिया इस्तीफा, उठे बड़े सवाल

स्वतंत्र बोल 
प्रयागराज 10 अप्रैल 2026। कैश कांड में लंबे समय से घिरे यशवंत वर्मा ने आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्याग पत्र द्रौपदी मुर्मू को सौंप दिया है। इस इस्तीफे के बाद न्यायपालिका के गलियारों में एक बार फिर उस रहस्यमयी घटना की गूंज तेज हो गई है, जिसने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया था।

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मामला उस वक्त सुर्खियों में आया था जब जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में अचानक आग लग गई थी। आग बुझाने के बाद जो सामने आया, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। पुलिस और दमकल कर्मियों को मौके पर भारी मात्रा में जले हुए कैश मिले थे। उस समय जस्टिस वर्मा शहर में मौजूद नहीं थे, जिससे इस पूरे घटनाक्रम ने और भी ज्यादा संदेह और सवाल खड़े कर दिए।

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इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने भी गंभीर चिंता जताई थी। संजीव खन्ना की अगुवाई में कॉलेजियम ने उन्हें वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की थी। हालांकि, कॉलेजियम के कुछ सदस्यों का मानना था कि केवल तबादला इस मामले का समाधान नहीं है और इससे न्यायपालिका की साख पर असर पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, उनके इस्तीफे की मांग भी इसी कारण उठी थी।

गौरतलब है कि जस्टिस वर्मा को पहले दिल्ली हाईकोर्ट से ट्रांसफर कर इलाहाबाद हाईकोर्ट लाया गया था। उस समय भी इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने उनके खिलाफ विरोध दर्ज कराया था। इतना ही नहीं, उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।

अब उनके इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या जले हुए नोटों का सच पूरी तरह सामने आ पाया है, या फिर इस कहानी के कुछ पन्ने अभी भी राख में दबे हुए हैं।