स्वतंत्र बोल
रायपुर 01 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। राज्य विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने नक्सलवाद के अंत को लेकर गहरी खुशी जाहिर करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को भावुक पत्र लिखकर आभार जताया है। उन्होंने इसे देश के लिए “नई सुबह” बताया और कहा कि अब छत्तीसगढ़ में विकास का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है।
रमन सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि 31 मार्च 2026 का दिन इतिहास में दर्ज हो गया है, क्योंकि इस दिन देश दशकों पुरानी उस समस्या से मुक्त हुआ है, जिसने हजारों जिंदगियां छीन ली थीं। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और अमित शाह की रणनीति को इसका श्रेय देते हुए कहा कि उनके दृढ़ संकल्प ने असंभव लगने वाले लक्ष्य को भी संभव कर दिखाया।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहले नक्सलवाद को केवल राज्य की समस्या मानकर नजरअंदाज किया जाता था, जबकि यह पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा था। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे राष्ट्रीय समस्या तो माना, लेकिन उस स्तर पर समाधान नहीं हो सका, जिसकी जरूरत थी। रमन सिंह ने यह भी कहा कि अगर उस समय मौजूदा नेतृत्व जैसा संकल्प होता, तो शायद यह समस्या पहले ही खत्म हो जाती।
हर असंभव कार्य को संभव करने वाले “साध्य पुरुष” माननीय केंद्रीय गृहमंत्री श्री @AmitShah जी ने भारत माता को नक्सलवाद की पीड़ा से मुक्ति दिलाकर राष्ट्र की सुरक्षा को चारों ओर से सुदृढ़ करने का अद्भुत कार्य किया है।
श्री अमित शाह जी को पत्र लिखकर भारत से नक्सलवाद की मुक्ति पर उनका… pic.twitter.com/6YkgJeTYwg
— Dr Raman Singh (@drramansingh) April 1, 2026
अपने पत्र में उन्होंने नक्सलवाद की विचारधारा को लोकतंत्र विरोधी बताते हुए कहा कि इसने नक्सलबाड़ी से लेकर बस्तर तक विकास को रोक दिया और आदिवासियों को मुख्यधारा से दूर कर दिया। उन्होंने सलवा जुडूम आंदोलन और महेंद्र कर्मा जैसे नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में भी नक्सलवाद के खिलाफ आवाज उठी, लेकिन उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया।
रमन सिंह ने अमित शाह की तुलना “लौह पुरुष” सरदार वल्लभभाई पटेल से करते हुए उन्हें देश का सबसे मजबूत गृहमंत्री बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह पटेल ने रियासतों का विलय कर भारत को एकजुट किया, उसी तरह अमित शाह ने देश को अंदरूनी खतरे से मुक्त करने का काम किया है।
पत्र के अंत में उन्होंने खास तौर पर बस्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि अब वहां विकास की नई राह खुलेगी। आदिवासी समुदाय को रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन के अवसर मिलेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि अब बस्तर के लोग डर के साये से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।
हालांकि इस बड़े दावे के बीच एक सवाल अभी भी हवा में तैर रहा है—क्या सच में नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो गया है, या यह किसी नए रूप में फिर सामने आ सकता है? फिलहाल, इस घोषणा ने उम्मीद की एक नई किरण जरूर जगा दी है, लेकिन आने वाला समय ही बताएगा कि यह बदलाव कितना स्थायी साबित होता है।


