महादेव ऐप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर की दिल्ली कोर्ट में पेशी: CBI ने जब्त किया फर्जी पासपोर्ट, ट्रांजिट रिमांड की मांग

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स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली/रायपुर 2 नवंबर 2026:
महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ओमान से प्रत्यर्पित कर लाए गए सौरभ चंद्राकर की रायपुर ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड मांगी है। इस दौरान जांच एजेंसी ने कोर्ट को सूचित किया कि आरोपी के पास से एक फर्जी पासपोर्ट भी जब्त किया गया है। अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई दोपहर 2:30 बजे (लंच के बाद) के लिए निर्धारित की गई।

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कोर्ट में गिरफ्तारी की वैधता पर तीखी बहस

सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के बचाव पक्ष के वकील ने उसकी गिरफ्तारी को अवैध ठहराते हुए प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जब भारत सरकार ने ओमान प्रशासन को केवल धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई की जानकारी दी थी, तो फिर सीबीआई किस आधार पर गिरफ्तारी कर रही है?

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इस पर सीबीआई ने पलटवार करते हुए स्पष्ट किया कि बचाव पक्ष ओमान सरकार के जिस आदेश का हवाला दे रहा है, वह पुराना है। सीबीआई के अनुसार, सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी नए आदेश के तहत की गई है, जिसमें किसी विशिष्ट जांच एजेंसी का सीमित उल्लेख नहीं है।

भिलाई में जूस की दुकान से यूएई में साम्राज्य तक

छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला सौरभ चंद्राकर शुरुआत में अपने पिता (जो नगर निगम में पंप ऑपरेटर थे) के साथ रहता था और खुद एक जूस की दुकान चलाता था। कम समय में ज्यादा पैसे कमाने की चाह में उसने अपने दोस्त रवि उत्पल के साथ मिलकर सट्टेबाजी शुरू की। 2019 में दोनों दुबई चले गए और ऑनलाइन ‘महादेव सट्टा ऐप’ लॉन्च किया। मोबाइल से आसानी से सट्टा खेलने की सुविधा के कारण यह ऐप जल्द ही बेहद लोकप्रिय हो गया और दोनों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में एक बड़ा अवैध नेटवर्क खड़ा कर लिया।

शादी में उड़ाए 200 करोड़, हवाला का बड़ा खेल

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के मुताबिक, फरवरी 2023 में यूएई के रस अल खैमाह (RAK) में हुई सौरभ चंद्राकर की शादी में लगभग 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए थे। रिश्तेदारों को नागपुर से यूएई ले जाने के लिए प्राइवेट जेट किराए पर लिए गए थे। मुंबई की एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को हवाला के जरिए 112 करोड़ रुपये दिए गए थे, जबकि 42 करोड़ रुपये होटलों की बुकिंग में खर्च किए गए थे।

महादेव ऐप गिरोह की हिस्सेदारी का भी खुलासा हुआ है, जिसमें सौरभ चंद्राकर के पास 50%, रवि उत्पल के पास 25%, अनिल अग्रवाल के पास 15% और शुभम सोनी के पास 10% हिस्सेदारी है। इस मामले में अब तक 70 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 300 से अधिक लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं।