स्वतंत्र बोल
रायपुर 2 नवंबर 2026: ओमान से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया महादेव ऐप का मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर कभी सड़क किनारे जूस की दुकान चलाता था। छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला सौरभ कपड़ों के शोरूम में नौकरी भी कर चुका है। उसके पिता नगर निगम में पंप ऑपरेटर थे। रातों-रात अमीर बनने की चाहत में उसने ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में ‘महादेव ऐप’ लॉन्च किया और देखते ही देखते 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का देश का सबसे बड़ा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी साम्राज्य खड़ा कर दिया।
2019 में दुबई जाकर बिछाया सट्टेबाजी का जाल
सीबीआई के अनुसार, सौरभ चंद्राकर साल 2019 में दुबई गया और वहां अपने दोस्त रवि उत्पल को भी बुला लिया। दोनों ने मिलकर ‘महादेव ऐप’ लॉन्च किया और भारत भर में क्रिकेट, फुटबॉल व ताश के खेलों पर सट्टेबाजी का अवैध नेटवर्क फैलाया। इस गिरोह ने देशभर में फ्रेंचाइजी आधारित पैनल और ब्रांच का नेटवर्क तैयार किया था, जो लोगों को जोड़ने और उनसे पैसे जुटाने का काम करता था। सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को फर्जी बैंक खातों के जरिए घुमाकर हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। ऐप की कमाई का एक हिस्सा कुछ सरकारी अधिकारियों को संरक्षण राशि के रूप में भी दिया जाता था।
दुबई की शादी में खर्च किए 200 करोड़ रुपये
सौरभ चंद्राकर उस समय सबसे ज्यादा चर्चा में आया था, जब उसने दुबई में अपनी शादी में करीब 200 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए थे। इस शाही शादी में बॉलीवुड के कई बड़े स्टार्स और हस्तियों ने शिरकत की थी। भारत से अपने रिश्तेदारों और मेहमानों को दुबई ले जाने के लिए सौरभ ने कई प्राइवेट जेट्स किराए पर लिए थे। पिछले तीन सालों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारत और विदेश के कई शहरों में छापेमारी की है। ईडी की जांच के दायरे में शीर्ष पुलिसकर्मी, नौकरशाह, फिल्म इंडस्ट्री के लोग, समाजसेवी और मीडियाकर्मी रहे हैं।
रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान में हुआ प्रत्यर्पण
सीबीआई प्रवक्ता के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था, जिसके आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने साक्ष्यों के साथ ओमान सरकार को औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजा। मंजूरी मिलने पर सीबीआई की विशेष टीम मस्कट पहुंची और उसे भारत लेकर आई। सीबीआई ने सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार व्यक्त किया है। मामले में सीबीआई ने भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और छत्तीसगढ़ जुआ अधिनियम के तहत आरोप-पत्र दाखिल किए हैं, वहीं ईडी ने पीएमएलए (PMLA) के तहत मामले दर्ज किए हैं।


