स्वतंत्र बोल
रायपुर 1 नवंबर 2026 : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और हजारों करोड़ के महादेव सट्टा ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। सीबीआई की टीम महादेव ऐप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से वापस भारत ले आई है। ओमान सरकार के सहयोग और इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर यह प्रत्यर्पण कार्रवाई पूरी की गई है। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आज ही सौरभ को भारत लाया गया है, जिसके बाद से जांच एजेंसियों की पूछताछ पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
जूस की दुकान से लेकर 6000 करोड़ के सट्टा साम्राज्य तक की कहानी
मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर मूल रूप से छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। अतीत में वह एक कपड़े की दुकान में काम करने के अलावा जूस की दुकान भी चलाता था। साल 2019 में वह दुबई चला गया और अपने साथी रवि उप्पल को भी वहां बुला लिया। इसके बाद उसने महादेव ऐप लॉन्च किया और धीरे-धीरे ऑनलाइन सट्टा बाजार का बड़ा नाम बन गया। इस ऐप के जरिए करीब 6000 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किए जाने का खुलासा हुआ है।
कैसे फैला महादेव ऐप का यह पूरा नेटवर्क?
महादेव सट्टा ऐप की शुरुआत साल 2016 में छत्तीसगढ़ के रहने वाले सौरभ चंद्राकर ने अपने दो साथियों रवि उप्पल और अतुल अग्रवाल के साथ मिलकर की थी। शुरुआती दौर में इसे ‘महादेव बुक’ के नाम से लॉन्च किया गया था, जहां क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन जैसे खेलों के साथ-साथ पोकर, तीन पत्ती और वर्चुअल गेम्स पर ऑनलाइन बेटिंग कराई जाती थी। यहां तक कि राजनीतिक चुनावों के नतीजों पर भी दांव लगाए जाते थे।
साल 2020 में सौरभ और उसके साथियों ने हैदराबाद के बड़े सट्टा प्लेटफॉर्म ‘रेड्डी अन्ना’ को लगभग 1000 करोड़ रुपये में टेकओवर कर लिया था, जिसके बाद इसके यूजर्स और सालाना कारोबार में भारी उछाल आया। साल 2022 से प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग ने इस सिंडिकेट के खिलाफ शिकंजा कसना शुरू किया था, और अब CBI के इस बड़े कदम के बाद मामले की जांच में और तेजी आने की उम्मीद है।


