रायपुर राज्योत्सव 2026: कांग्रेस नेताओं के शामिल न होने पर गरमाई सियासत, बीजेपी सांसद ने कसा तंज

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स्वतंत्र बोल
रायपुर 1 नवंबर 2026:
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 समारोह में कांग्रेस नेताओं के शामिल नहीं होने पर सियासी पारा चढ़ गया है। राजनांदगांव से भारतीय जनता पार्टी के सांसद संतोष पांडेय ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के एक भी नेता कार्यक्रम में नहीं आए, क्योंकि उन्हें राज्य की इस खुशी से कोई मतलब नहीं है। कांग्रेस नेताओं का छत्तीसगढ़ से प्रेम केवल कुर्सी के लिए है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जैसे कालनेमि राक्षस ढोंगी था, वैसा ही प्रेम इनका छत्तीसगढ़ से है।

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छत्तीसगढ़ का गठन और तेलंगाना के हालात पर बयान

मीडिया से चर्चा के दौरान सांसद संतोष पांडेय ने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण को याद करते हुए कहा कि लोग अलग राज्य के लिए कल्पना करते थे। कांग्रेस ने अलग राज्य का गठन किया, लेकिन तेलंगाना जैसे राज्यों में खूब खून-खराबा हुआ। इसके विपरीत छत्तीसगढ़ बिना किसी बड़े खून-खराबे के अलग राज्य के रूप में बना और आज यहां पूरी तरह अमन-चैन है।

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मॉक पार्लियामेंट और बस्तर के हालात पर निशाना

दिल्ली में कांग्रेस द्वारा मॉक पार्लियामेंट चलाए जाने के सवाल पर संतोष पांडेय ने पलटवार करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बस्तर में जनताना सरकार चलाई जाती थी और सबकी जानकारी में है कि तब इनकी सरकार बंदूक की नोक पर चलती थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मोदी जी ने इन्हें सही मायनों में ‘दिमागी नक्सली’ कहा है। वे सदन के अंदर रहते हैं तब तो बोलते नहीं और वहां से भागते हैं। उन्होंने शायरी अंदाज में तंज कसा कि ताउम्र यही गलती करते रहे, धूल चेहरे पर थी और आइना साफ करते रहे।

निकाय और अहिवारा उपचुनाव पर बोले सांसद

आगामी नगरीय निकाय चुनावों और अहिवारा उपचुनाव की तैयारियों को लेकर सांसद संतोष पांडेय ने कहा कि पार्टी भाजपा विधायक स्व. डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन से स्तब्ध है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया के तहत विधान में रिक्त स्थानों की पूर्ति करनी होती है। उपचुनाव हो या निकाय चुनाव, बीजेपी हर वक्त लड़ाई और युद्ध की तैयारी में रहती है। उन्होंने कहा कि चुनाव को लेकर लगातार बैठकें और शक्ति केंद्रों के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, क्योंकि बीजेपी में संगठनात्मक बैठकें निरंतर चलती रहती हैं।