स्वतंत्र बोल
रायपुर 14 सितम्बर 2026: ऐतिहासिक गोल बाजार में गणेशोत्सव की परंपरा 117 साल पुरानी है। हर साल यहां गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस परंपरा का धार्मिक महत्व होने के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी है।
गोल बाजार में 117 साल से हो रहा गणेशोत्सव
श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति की ओर से ऐतिहासिक गोल बाजार के पास हनुमान मंदिर में पिछले 117 वर्षों से भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा आज भी जारी है।
इस गणेशोत्सव में स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। गणेश प्रतिमा गोल बाजार क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है।
आखिर इतनी खास क्यों है यह परंपरा?
117 साल तक लगातार किसी धार्मिक परंपरा का जारी रहना अपने आप में खास है। इसके पीछे केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि लोगों की सामूहिक भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
गणेशोत्सव के जरिए नई पीढ़ी भी स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ती है। यही वजह है कि यह आयोजन समय के साथ केवल पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक जुड़ाव का माध्यम भी बना है।
हनुमान मंदिर का भी है पुराना धार्मिक महत्व
गोल बाजार स्थित हनुमान मंदिर भी इस आयोजन से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर 150 साल से अधिक पुराना बताया गया है। गणेशोत्सव के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश के साथ हनुमान जी के दर्शन भी करते हैं।
इस तरह गोल बाजार का यह क्षेत्र रायपुर की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ सामने लाता है।
मुख्यमंत्री ने की भगवान गणेश की पूजा
गणेश चतुर्थी के मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रात में गोल बाजार पहुंचे। उन्होंने श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति के पंडाल में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की।
मुख्यमंत्री ने भगवान गणेश को मुकुट पहनाया, तिलक लगाया और आरती की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोगों की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद उन्होंने गोल बाजार के प्राचीन हनुमान मंदिर में भी दर्शन किए।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान गणेश प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता हैं। गणेशोत्सव आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है। यह समाज को परंपरा और सामूहिक सहभागिता के साथ जोड़ता है।
उन्होंने गोल बाजार में 117 वर्षों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपरा की सराहना की। उनके मुताबिक, पीढ़ी-दर-पीढ़ी ऐसी परंपराओं को आगे बढ़ाना हमारी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का काम करता है।
क्या महत्व है?
गोल बाजार का 117 साल पुराना गणेशोत्सव बताता है कि धार्मिक परंपराएं समय के साथ भी लोगों को जोड़कर रख सकती हैं। ऐसे आयोजन पुरानी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम करते हैं।
रायपुर में गणेशोत्सव के दौरान गोल बाजार इसलिए भी खास हो जाता है, क्योंकि यहां 117 साल की गणेश पूजा परंपरा और 150 साल से अधिक पुराने हनुमान मंदिर की धार्मिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।


