Old Pension Scheme News: 80 हजार शिक्षकों की ओपीएस अटकी, जानिए क्यों रिव्यू में जा रहा शिक्षा विभाग

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स्वतंत्र बोल
भोपाल 4 अक्टूबर 2026: 
मध्य प्रदेश में 1 जनवरी 2005 से पहले नियुक्त हुए करीब 80 हजार शिक्षकों की पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर संशय गहरा गया है। हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा 2018 में संविलियन में शामिल शिक्षकों को ओपीएस का हकदार मानने के स्पष्ट आदेश के तीन महीने बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग ने इसे लागू करने पर कोई निर्णय नहीं लिया है। अब विभाग इस फैसले को लागू करने के बजाय इसके खिलाफ हाईकोर्ट की डबल बेंच में रिव्यू याचिका (पुनर्विचार याचिका) दाखिल करने की तैयारी कर रहा है, जिसके लिए 5 अक्टूबर को जबलपुर में विधि विशेषज्ञों के साथ अहम बैठक बुलाई गई है।

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संविलियन को केवल पदनाम बदलाव माना था कोर्ट ने

हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ ने ‘सुशील कुमार तिवारी बनाम मप्र शासन’ के मामले में शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। अदालत ने साल 2008 के अध्यापक संवर्ग नियमों के नियम 5 का उल्लेख करते हुए संविलियन को केवल पदनाम का बदलाव माना था। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पूर्व शिक्षाकर्मियों को न्यू पेंशन स्कीम (NPS) से राहत देते हुए उनके एनपीएस फंड को ट्रांसफर किया जाए और उन्हें पुरानी पेंशन के दायरे में लाया जाए।

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भारी वित्तीय भार का तर्क दे रहा विभाग

पेंशन मामले से जुड़े विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि 30 दिसंबर 2004 से पहले नियुक्त शिक्षकों को ओपीएस देने से राज्य शासन पर भारी वित्तीय बोझ आएगा। इसी वित्तीय भार को आधार बनाकर विभाग फैसले को डबल बेंच में चुनौती देने जा रहा है। कानूनी रणनीति तय करने के लिए 5 अक्टूबर को जबलपुर में बुलाई गई बैठक में महाधिवक्ता और अतिरिक्त महाधिवक्ता समेत शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे।

शिक्षकों का पक्ष और अब तक का पूरा घटनाक्रम

यह पूरा विवाद साल 2018 में हुए संविलियन के समय से चल रहा है, जब विभाग ने 2018 के नियमों का हवाला देकर शिक्षकों पर एनपीएस लागू कर दिया था। शिक्षक नेता राजेश मिश्रा के अनुसार शिक्षकों की सेवा में कोई व्यवधान नहीं रहा है और कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी विभाग इसे लागू न कर अवमानना की स्थिति बना रहा है। अब मामले का भविष्य 5 अक्टूबर की बैठक, रिव्यू याचिका के दाखिले और डबल बेंच की सुनवाई पर टिका हुआ है।