स्वतंत्र बोल
रायपुर 25 मई 2026: कश्मीर के गुलमर्ग में हुई एक अहम संसदीय बैठक में छत्तीसगढ़ के कोरबा को लेकर ऐसा मुद्दा उठा, जिसने प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर बदलने की उम्मीद जगा दी है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने देश को उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की चर्चा के बीच कोरबा को “गेम चेंजर” बताते हुए बड़ा प्रस्ताव रखा।
रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में शामिल हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारत आज भी यूरिया उत्पादन के लिए करीब 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस विदेशों से आयात करता है, जिससे देश की विदेशी निर्भरता लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने बैठक में जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि देश ‘कोल गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी’ की दिशा में तेजी से काम करे। यानी कोयले से गैस बनाकर यूरिया तैयार किया जाए। इस तकनीक के लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा को देश का सबसे उपयुक्त क्षेत्र बताया।
सांसद ने तर्क दिया कि कोरबा में प्रचुर मात्रा में कोयले का भंडार मौजूद है। साथ ही यहां बड़े औद्योगिक संयंत्र लगाने के लिए जरूरी जमीन और आधारभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। ऐसे में अगर यहां नया यूरिया प्लांट स्थापित होता है, तो इससे न केवल छत्तीसगढ़ को औद्योगिक मजबूती मिलेगी, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि कोरबा में संयंत्र लगने से देश की उर्वरक आत्मनिर्भरता को बड़ा बल मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम हो सकेगी।
बृजमोहन अग्रवाल ने इस पूरी जानकारी को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। उन्होंने बताया कि बैठक में राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड (NFL), राष्ट्रीय रसायन एवं उर्वरक लिमिटेड (RCF), हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL), रामागुंडम उर्वरक निगम लिमिटेड (RFCL) समेत कई बड़ी कंपनियों और संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अब इस बयान के बाद कोरबा को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि अगर यह योजना जमीन पर उतरती है, तो छत्तीसगढ़ देश के सबसे बड़े उर्वरक और औद्योगिक हब में शामिल हो सकता है।


