अंदरूनी खबर: साय की छुट्टी से मजबूत हुए साय के हाथ.. लाखो में उत्साह तो सैकड़ो में निराशा !

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स्वतंत्र बोल 25 सितंबर 2026.  हमेशा अपने फैसलों से लोगो को हतप्रभ करने वाली बीजेपी ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ के लोगो को हैरान किया है। बीजेपी ने एक साथ क्षेत्रीय संगठन मंत्री और प्रदेश संगठन मंत्री को बदल दिया, जिसके बाद से बीजेपी की राजनीती में तूफान सा आ गया है। पवन साय करीब 11 वर्षो से छत्तीसगढ़ बीजेपी में संगठन मंत्री की भूमिका में थे, बीजेपी की सरकार गई और लौटकर सत्ता में वापसी भी की। पवन साय और अजय जामवाल दोनों को एक साथ हटाकर बड़ा मैसेज दिया गया है। इस निर्णय से कुछ सत्ता में काजू कतली खा रहे नेता और प्रमुख पदाधिकारी दुखी होंगे, सत्ता में भागीदार नहीं हो पाने वाले कार्यकर्ताओ में उत्साह में है। साल 2023 में बीजेपी सत्ता में वापस आई तो बीजेपी के देवतुल्य कार्यकर्ताओ की उम्मीदें बढ़ गई थी, उन्हें अपेक्षा थी कि उनकी सुनवाई होगी पर समय के साथ यह भ्रम भी दूर होता गया है। जिसके बाद प्रदेश भर में अलग अलग जिलों और ब्लॉक में सैकड़ो की संख्या में कार्यकर्ताओ ने अपनी ही सरकार में सुनवाई ना होने के आरोप लगा पार्टी और पद से इस्तीफा देना शुरू कर दिया।

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रायगढ़ से लेकर बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी, राजनांदगांव और बस्तर जिले में कार्यकर्ताओ ने इस्तीफा दिया। कार्यकर्ताओ ने सोचा होगा कि उन्हें मनाया- समझाया जायेगा पर ऐसा नहीं हुआ। उधर संगठन और सरकार के बीच पतली लकीर अप्रत्याशित रूप से खींच गई थी, जिसमे दोनों तरफ साय थे। जिसका खामियाजा पार्टी के कार्यकर्ताओ को और सरकार को अपने फैसलों पर चुकाना पड़ा। पार्टी पदाधिकारियों की बातो को सही मान लें तो दोहरे आदेश हो रहे थे। एक तरफ महानदी भवन और सिविल लाइन से दूसरा कुशाभाऊ ठाकरे से.. बताते तो यह भी है दूसरे साय को जानबूझकर कमजोर करने और दिखाने की कोशिश की गई। कभी फेक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होता तो बार-बार सीएम बदलने की खबरे मीडिया की सुर्खियां बनती। यह सब सामान्य चर्चाये नहीं थी, साई के इर्द गिर्द रहने वाले दर्जन भर लोगो ने ऐसा माहौल बनाया था कि सारा काम कुशाभाऊ ठाकरे से हो रहा.. इस तरह संगठन के भीतर भी विकल्प तैयार किया जा रहा था। चर्चा तो यह भी थी कि सर्वाधिक समय तक मंत्री रहने वाले बस्तर संभाग के नेता को अब मंत्री से आगे बढ़ाने की योजनाए बनाई जा रही थी, पर दिल्ली में बैठने वाले जिन्होंने साय को बिठाया है, एक-एक रिपोर्ट लेते रहे, और अब ऐसा शॉट मारा कि बॉल स्टेडियम के बाहर पहुंचा दिया।

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किसी भी मनुष्य में लंबे समय तक पद, पावर और सत्ता सुख में रहने से अहंकार आ जाता है, और पवन जी भी मनुष्य ही है, भले ही उन्हें कोई चमत्कारिक शक्तियां मिली हो। प्रदेश भर में कार्यकर्ताओ ने इस्तीफ़ो की झड़ी लगा दी, सडको के गड्ढो में संगठन की गाडी फंसने लगी और साय जी बैठकों में फोटो फ्रेम करते रहते। आम आम तौर पर संगठन मंत्री या संगठन प्रमुख मंच के फोटो और वीडियो से परहेज करते है, बीएल संतोष इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हो सकते है। लेकिन जब मीडिया आपको संगठन शिल्पी कहने लगे, सोशल मीडिया मे आपके फोटो के साथ पक्ष में लोग कूद जाए तो मामला गड़बड़ाने लगता है। इस निर्णय से बीजेपी के हताश निराश लाखो कार्यकर्ताओ में उत्साह हो सकता है, दुखी तो वे फूफा भी होंगे जो सत्ता के भागीदार नहीं है और वे भी प्रशासन के मौसम वैज्ञानिक भी.. जो दोनों साय के बीच अपना काम साधते थे। महानदी से निकले आदेशों को कुशाभाऊ ठाकरे जाकर अमल होने से पहले बयां कर आते थे। झारखण्ड में पंचायत चुनाव 2027 में और विधानसभा चुनाव में 2029 में होगा तक तक वहा सिवाय परिश्रम के कुछ नहीं होगा। बीजेपी ने इस फेरबदल से स्पष्ट सन्देश दिया है और इस संदेश से सबसे ज्यादा मजबूत साय हुए है, जिन्हे योजनापूर्वक कमजोर साबित करने की कोशिश हो रही थी।

 

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