स्वतंत्र बोल
रायपुर 15 जून 2026: छत्तीसगढ़ के संगीत जगत से सोमवार को एक ऐसी खबर सामने आई, जिसने हजारों-लाखों प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया। छत्तीसगढ़ी रैप संगीत को नई पहचान दिलाने वाले और प्रदेश के पहले रैप सिंगर के रूप में मशहूर Appy Raja अब इस दुनिया में नहीं रहे। लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे Appy Raja ने रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही भानुप्रतापपुर से लेकर पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई।
सोशल मीडिया पर जैसे ही उनके निधन की सूचना पहुंची, प्रशंसकों ने श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ ला दी। बताया जा रहा है कि उनका अंतिम संस्कार 16 जून को भानुप्रतापपुर में किया जाएगा।
Appy Raja सिर्फ एक नाम नहीं थे, बल्कि संघर्ष, जुनून और सपनों को सच करने की मिसाल थे। उनका असली नाम चेतन चांडक था। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर से निकलकर उन्होंने छत्तीसगढ़ी रैप को ऐसी पहचान दिलाई, जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। महज 13-14 साल की उम्र में उन्होंने रैप लिखना शुरू कर दिया था। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने अपना पहला रैप तैयार किया, लेकिन आर्थिक तंगी इतनी थी कि उसे रिकॉर्ड करवाने तक के पैसे नहीं थे।
उनकी जिंदगी आसान नहीं रही। वर्ष 1994 में नवागढ़ में जन्मे चेतन का बचपन संघर्षों के बीच बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। पढ़ाई के लिए उन्हें रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया।
उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने ‘टूरा भोको लोलो’ लिखा। यह गीत वर्षों तक उनके पास सिर्फ कागजों में कैद रहा। फिर साल 2015 में पंजाब की एक म्यूजिक कंपनी का मेल आया और किस्मत ने करवट ली। कंपनी को उनका रैप पसंद आया और उन्हें पंजाब बुलाया गया। वहीं इस गाने को रिकॉर्ड कर यूट्यूब पर रिलीज किया गया।
रिलीज के बाद जो हुआ, उसने Appy Raja को रातों-रात पहचान दिला दी। ‘टूरा भोको लोलो’ सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लाखों लोगों ने इस गाने को सुना और शेयर किया। इसके बाद Appy Raja छत्तीसगढ़ी युवाओं की नई आवाज बन गए।
लेकिन सफलता के पीछे दर्द की लंबी कहानी भी छिपी थी। जब वे 11वीं कक्षा में थे, तभी उनके पिता को हार्ट अटैक आया। घर की आर्थिक हालत बिगड़ गई। मां ने सिलाई का काम शुरू किया और परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गईं। हालात ऐसे बने कि Appy Raja को गुजरात के सूरत में कपड़ों की दुकान पर नौकरी तक करनी पड़ी। वहां कुछ हजार रुपये की तनख्वाह में उन्होंने काम किया, लेकिन उनका दिल संगीत में बसता था। आखिरकार वे वापस लौट आए और अपने सपनों के पीछे फिर से दौड़ पड़े।
पंजाब में संघर्ष के दिनों में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रहने और खाने तक की परेशानी थी, लेकिन उनके हुनर ने उन्हें ऐसे लोगों से मिलवाया जिन्होंने उनका साथ दिया। पंजाबी संगीत जगत से जुड़े लोगों और उनके गुरु सरजीत शानू ने उन्हें सहारा दिया। स्टूडियो में रात-रात भर मेहनत कर वे गीत लिखते, संगीत तैयार करते और अपने सपनों को आकार देते रहे।
Appy Raja ने सिर्फ मनोरंजन ही नहीं किया, बल्कि अपने गीतों के जरिए प्रेरणादायक संदेश भी दिए। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, शहीद भगत सिंह और देशभक्ति जैसे विषयों पर भी रैप गीत तैयार किए, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा।
आज वह आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई, जिसने छत्तीसगढ़ी रैप संगीत को नई पहचान दी थी। लेकिन उनके गीत, उनका संघर्ष और उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।


