जिसे पाक सेना फूलों से नवाज़े, वही है पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड – सैफुल्लाह खालिद

जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस हमले में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में उनका इलाज जारी है।इस नृशंस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने ली है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में लश्कर और टीआरएफ की गतिविधियों के पीछे जिस व्यक्ति का नाम सबसे प्रमुख रूप से सामने आ रहा है, वह है सैफुल्लाह खालिद उर्फ सैफुल्लाह कसूरी।

सैफुल्लाह खालिद लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ और भारत के वांछित आतंकियों में से एक है। वह आतंकी सरगना हाफीज सईद का करीबी माना जाता है और कई बड़े हमलों में इसकी भूमिका की पुष्टि हो चुकी है। वह अक्सर लग्ज़री कारों में घूमता है और लश्कर के heavily armed आतंकियों द्वारा सुरक्षा घेरे में रहता है। पाकिस्तान में उसका प्रभाव इस कदर है कि सेना के अधिकारी तक उसका खुलेआम सम्मान करते हैं।

सूत्रों के अनुसार, हमले से कुछ समय पहले सैफुल्लाह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कंगनपुर पहुंचा था, जहां उसे पाकिस्तानी सेना के एक कर्नल द्वारा जेहादी भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस दौरान सैफुल्लाह पर फूल बरसाए गए और उसने भारतीय सेना के खिलाफ उकसावेभरे भाषण दिए। उसने दावा किया था कि 2 फरवरी 2026 तक कश्मीर को “आज़ाद” करने का प्रयास तेज़ किया जाएगा।

इससे पहले भी खैबर पख्तूनख्वा में एक सभा में उसने इसी तरह के भड़काऊ बयान दिए थे। उस कार्यक्रम का आयोजन ISI और पाक सेना के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था, जिसमें भारी संख्या में हथियारबंद आतंकी शामिल हुए थे।एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल एबटाबाद के जंगलों में लश्कर-ए-तैयबा के राजनीतिक फ्रंट PMML और SML द्वारा आयोजित एक आतंकी कैंप में सैकड़ों पाकिस्तानी युवाओं ने भाग लिया था। इस कैंप में सैफुल्लाह खालिद ने युवाओं का चुनाव कर उन्हें टारगेट किलिंग के लिए प्रशिक्षण दिया और भारत के खिलाफ भड़काया।

उन्हीं युवाओं को पाकिस्तानी सेना की मदद से सीमा पार भेजे जाने की भी खबरें हैं। माना जाता है कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने लश्कर और जैश जैसे संगठनों को नया नाम देने के लिए ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ की स्थापना की थी। आज यह संगठन कश्मीर घाटी में सक्रिय है और लश्कर की फंडिंग का इस्तेमाल करता है।

भारत सरकार ने भी इस संगठन की भूमिका को लेकर स्पष्ट बयान दिया है। गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया था कि टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा का ही एक मुखौटा संगठन है। इसकी हिट स्क्वॉड और फाल्कन स्क्वॉड जैसे टुकड़ियां आने वाले समय में घाटी की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।