स्वतंत्र बोल
रायपुर 17 अक्टूबर 2026: बस्तर दशहरा में फूल रथ की परिक्रमा के दौरान बिजली का एक खंभा भीड़ में गिर गया। विशालकाय रथ बिजली के पोल से टकराया था। घटना के समय वहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण मौजूद थे। पोल गिरते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। गनीमत रही कि कोई बिजली के तार की चपेट में नहीं आया।
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रथ की टक्कर से गिरा बिजली का खंभा
फूल रथ की परिक्रमा के दौरान रथ बिजली के खंभे से टकरा गया। टक्कर इतनी गंभीर थी कि पोल भीड़ की ओर गिर पड़ा। उस समय रथ खींचने और परिक्रमा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान बिजली के खंभों और तारों से जुड़े खतरों को लेकर पर्याप्त सावधानी जरूरी है।
बिजली की सप्लाई बंद नहीं होने पर उठे सवाल
घटना को लेकर सीएसईबी विभाग की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रथ परिक्रमा के दौरान संबंधित इलाके में बिजली की सप्लाई बंद नहीं की गई थी और तारों में करंट दौड़ रहा था।
ऐसे में पोल गिरने के बाद यदि कोई व्यक्ति बिजली के तार के संपर्क में आ जाता, तो जानलेवा हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने इस मामले में नाराजगी जताई। हालांकि, घटना के बाद विभाग की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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सप्तमी तक होती है फूल रथ की परिक्रमा
बस्तर दशहरा के दौरान नवरात्रि के दूसरे दिन से सप्तमी तक दंतेश्वरी मंदिर परिसर में फूल रथ की परिक्रमा कराई जाती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
इस दौरान करीब 200 ग्रामीण मिलकर विशाल रथ खींचते हैं। रथ पर मां दंतेश्वरी के छत्र को विराजित कर परिक्रमा कराई जाती है। इस धार्मिक परंपरा को देखने के लिए सैकड़ों लोग पहुंचते हैं। पूरा मंदिर परिसर और आसपास का इलाका भक्तिमय हो जाता है।
बिजली के खंभों और तारों से सुरक्षा पर सवाल
बस्तर दशहरा विश्व प्रसिद्ध आयोजन है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। आयोजन के लिए प्रशासन और संबंधित विभाग हर साल करोड़ों रुपये खर्च करते हैं। इसके बावजूद फूल रथ की परिक्रमा के दौरान बिजली के खंभों और तारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित इलाके में बिजली की लाइनें अब तक भूमिगत नहीं की गई हैं। स्थानीय स्तर पर इसे रथ परिक्रमा के दौरान बने रहने वाले जोखिम से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बार रथ के पोल से टकराने और खंभे के गिरने की घटना ने इन सुरक्षा इंतजामों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।


