स्वतंत्र बोल
रायपुर,23 मई 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में शुक्रवार को सहकारिता क्षेत्र को लेकर बड़ी रणनीतिक बैठक हुई, जिसमें छह राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” विजन को जमीन पर उतारने के लिए आयोजित इस क्षेत्रीय कार्यशाला में गांवों की अर्थव्यवस्था बदलने, किसानों की आय बढ़ाने और सहकारी संस्थाओं को हाईटेक व बहुउद्देशीय बनाने पर बड़ा मंथन हुआ।
सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने की। इसमें बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की पहल पर चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। खासतौर पर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों यानी पैक्स को बहुउद्देशीय ग्रामीण सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि अब पैक्स समितियां सिर्फ किसानों को ऋण देने तक सीमित नहीं रहेंगी। इन्हें डेयरी, मत्स्य पालन, खाद-बीज वितरण, धान खरीदी, वेयरहाउसिंग, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और ग्रामीण उद्यमिता जैसे कई कामों से जोड़ा जाएगा। इसका मकसद गांवों में ही रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करना है।
कार्यशाला में देशभर में 2 लाख नई डेयरी, मत्स्य और बहुउद्देशीय पैक्स समितियों के गठन की दिशा में हो रही प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी अनाज भंडारण योजना को लेकर भी रणनीति तैयार की गई।
बैठक में मौजूद विशेषज्ञों ने कहा कि अगर पैक्स समितियों को आधुनिक तकनीक और व्यवसायिक मॉडल से जोड़ा गया, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे किसानों, पशुपालकों और मछली पालकों को सीधे फायदा मिलेगा और गांवों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
कार्यशाला में पैक्स समितियों के बिजनेस डायवर्सिफिकेशन यानी व्यवसायिक विस्तार पर भी गंभीर चर्चा हुई। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सहकारी संस्थाओं को आर्थिक रूप से इतना मजबूत बनाया जाए कि वे गांवों के विकास का सबसे बड़ा आधार बन सकें।


