डिग्री-Resume तैयार, फिर भी पहली नौकरी मुश्किल; 65% कंपनियों में घटी भर्ती

Graduate looking at computer screen

स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 9 अक्टूबर 2026:
डिग्री हाथ में है, Resume तैयार है और पहली नौकरी का सपना भी। लेकिन फ्रेशर्स के लिए कॉरपोरेट जगत में नौकरी पाना चुनौतीपूर्ण होता दिख रहा है। इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन (ICRIER) की रिपोर्ट के मुताबिक, 65% कंपनियों में हायरिंग घटी है। वहीं, सिर्फ 24% कंपनियों में भर्ती बढ़ी है। रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में IT सेक्टर में एंट्री-लेवल हायरिंग धीमी होने की बात भी सामने आई है।

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फ्रेशर्स के लिए क्यों बढ़ रही चुनौती?

नौकरी के बाजार में चिंता सिर्फ छंटनी की नहीं है। नए उम्मीदवारों के लिए चुनौती यह भी है कि कंपनियां पहले की तुलना में कम भर्ती कर रही हैं। ऐसे में डिग्री लेने के बाद पहली नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के सामने अलग तरह की मुश्किल खड़ी हो रही है।

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ICRIER की रिपोर्ट को पांच विशेषज्ञों ने तैयार किया है। इनमें दीपक मिश्रा भी शामिल हैं। वह ओडिशा सरकार की मुख्यमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद (CM-EAC) के सदस्य हैं।

IT सेक्टर में AI बदल रहा काम का ढांचा

दीपक मिश्रा के मुताबिक, AI के कारण IT सेक्टर में वर्कफोर्स का ढांचा बदल रहा है। एंट्री-लेवल पर हायरिंग धीमी हो रही है, जबकि ज्यादा स्किल वाले मिड-लेवल कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है।

इस बदलाव के बीच फ्रेशर्स के लिए नौकरी के बाजार को समझना जरूरी हो जाता है। रिपोर्ट में भर्ती, जरूरी स्किल्स और काम की प्रोडक्टिविटी पर GenAI के असर को समझने के लिए सर्वे किया गया।

651 IT कंपनियों पर हुआ सर्वे

नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 10 भारतीय शहरों की 651 IT कंपनियों का सर्वे किया गया। इसका मकसद यह समझना था कि जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (GenAI) का नौकरियों, जरूरी स्किल्स और काम की प्रोडक्टिविटी पर क्या असर पड़ रहा है।

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि कंपनियों में हायरिंग का रुझान एक जैसा नहीं है। जहां 65% कंपनियों में भर्ती घटी, वहीं 24% कंपनियों में हायरिंग बढ़ी। ये आंकड़े फ्रेशर्स के लिए नौकरी के बदलते बाजार की तस्वीर सामने रखते हैं।

दीपक मिश्रा, सदस्य, मुख्यमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद, ओडिशा के मुताबिक, सर्वे का उद्देश्य GenAI के कारण नौकरियों, जरूरी स्किल्स और काम की प्रोडक्टिविटी में हो रहे बदलावों को समझना था।