नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रखा विकास का ब्लूप्रिंट, नक्सलगढ़ से रोजगार और पर्यटन हब बनाने की तैयारी

स्वतंत्र बोल
रायपुर 11 जून 2026: कभी नक्सल हिंसा की पहचान रहे बस्तर को अब विकास, रोजगार और आर्थिक समृद्धि के नए मॉडल के रूप में स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में बस्तर के लिए ऐसा विजन पेश किया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

ad

मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के हर परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने का बड़ा संकल्प लेते हुए अगले तीन वर्षों में मासिक आय 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है, जिसे खेती, पशुपालन, वन उपज और ग्रामीण उद्योगों के माध्यम से बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

youtube

बैठक में मुख्यमंत्री ने बस्तर में दुग्ध क्रांति लाने का रोडमैप भी रखा। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे गांवों में स्थायी आय का स्रोत विकसित होगा। डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण और परिवहन जैसी गतिविधियों से महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

खेती को मजबूत बनाने के लिए सरकार 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की दो बड़ी सिंचाई परियोजनाएं शुरू करने जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे किसानों को सालभर पानी मिलेगा और वे धान के अलावा फल, सब्जियां और नकदी फसलों का उत्पादन भी कर सकेंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बस्तर के करीब 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है, जिससे मरीजों का पूरा चिकित्सा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा और इलाज की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में स्थापित करीब 200 सुरक्षा शिविरों को अब “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जाएगा।

पर्यटन को रोजगार का बड़ा माध्यम बनाने के लिए सरकार चित्रकोट जलप्रपात और सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और तकनीक आधारित विकास के जरिए बस्तर की नई पहचान बनाई जा रही है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। साथ ही 341 पीएमश्री स्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन के जरिए युवाओं को तकनीक, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर काम कर रही है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायो-एथेनॉल, गारमेंट और टेक्सटाइल क्षेत्रों में नए निवेश आकर्षित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। बस्तर अब संघर्ष की नहीं, बल्कि विकास, निवेश, रोजगार और समृद्धि की नई कहानी लिखने जा रहा है।