गोबर घोटाले में बड़ा एक्शन! फर्जी दस्तावेज, जाली हस्ताक्षर और लाखों की बंदरबांट… वन अफसर सस्पेंड

स्वतंत्र बोल
मरवाही 28 मई 2026: छत्तीसगढ़ के मरवाही वनमंडल में हुए बहुचर्चित गोबर खरीदी घोटाले में आखिरकार बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। करोड़ों के सरकारी काम के बीच गोबर खाद खरीदी के नाम पर हुए कथित फर्जीवाड़े ने पूरे वन विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर मरवाही वन परिक्षेत्र के तत्कालीन रेंजर रमेश कुमार खैरवार को निलंबित कर दिया गया है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उस समय के डीएफओ रौनक गोयल की भूमिका को लेकर उठ रहा है।

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नवा रायपुर स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने रेंजर रमेश खैरवार को सस्पेंड करते हुए उन्हें बिलासपुर स्थित सीसीएफ कार्यालय से अटैच कर दिया है। मामला वर्ष 2022 में पौधारोपण कार्य के नाम पर गोबर खाद खरीदी में लगभग 14 लाख 77 हजार 600 रुपये के कथित घोटाले से जुड़ा है। इससे पहले कैंपा फंड शाखा के प्रभारी सहायक ग्रेड-दो भूपेंद्र कुमार साहू पर भी कार्रवाई हो चुकी है।

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जांच में जो खुलासे सामने आए हैं, उन्होंने विभाग के अंदर हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि गोबर खाद खरीदी दिखाने के लिए फर्जी बिल और वाउचर तैयार किए गए। इतना ही नहीं, तत्कालीन एसडीओ के जाली हस्ताक्षर कर फाइलों का सत्यापन कराया गया और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भुगतान की मंजूरी दे दी गई।

बिलासपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक मनोज कुमार पांडेय की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि अक्टूबर 2024 में कथित सप्लायरों की फर्जी सूची तैयार की गई थी। आरोप यह भी है कि फॉरेस्टर श्रीकांत परिहार को निलंबन की धमकी देकर डीएफओ कार्यालय बुलाया गया और उनसे खाली वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए गए। बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल भुगतान प्रक्रिया पूरी करने में किया गया।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि 21 अक्टूबर 2024 को एचडीएफसी बैंक के जरिए 14.77 लाख रुपये कथित सप्लायरों के खातों में ट्रांसफर किए गए और बाद में रकम निकालकर वापस रेंजर को सौंप दी गई। जांच में फॉरेस्टर श्रीकांत परिहार ने बयान दिया कि यह पैसा ऊपर तक पहुंचाने की बात कही गई थी। इस पूरे मामले से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ था, जिसने विवाद को और हवा दे दी।

मामला उस वक्त और ज्यादा सुर्खियों में आया जब छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में भी इसकी गूंज सुनाई दी। अब स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि तत्कालीन डीएफओ रौनक गोयल, रेंजर रमेश खैरवार और कैंपा प्रभारी भूपेंद्र साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।

लोगों का कहना है कि यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में जाली हस्ताक्षर और सत्ता का दुरुपयोग करने जैसा गंभीर अपराध है। फिलहाल मामले में विभागीय कार्रवाई जारी है, लेकिन अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या जांच की आंच बड़े अफसरों तक भी पहुंचेगी।