स्वतंत्र बोल
जगदलपुर, 16 मई 2026: जगदलपुर माओवादी संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर चल रहा केंद्रीय समिति का सदस्य और 20 लाख रुपये का इनामी माओवादी पसुनूरी नरहरि आखिरकार सामने आ गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उसने अकेले नहीं, बल्कि अपनी पत्नी के साथ आत्मसमर्पण किया।
नरहरि, जिसे संगठन में संतोष के नाम से भी जाना जाता था, तेलंगाना के हनमकोंडा का रहने वाला बताया जा रहा है। वह लंबे समय से झारखंड और आसपास के इलाकों में माओवादी गतिविधियों का बड़ा चेहरा माना जाता था। संगठन के भीतर उसकी पकड़ काफी मजबूत थी और वह बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के साथ पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुका था।
बीमारी बनी सरेंडर की वजह!
सूत्रों के मुताबिक लगातार बिगड़ती सेहत ने आखिरकार नरहरि को हथियार छोड़ने पर मजबूर कर दिया। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य खराब होने के कारण उसने तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर करने का फैसला लिया।
उसकी पत्नी जोबा उर्फ पूनम ने भी उसके साथ आत्मसमर्पण किया है। वह खुद क्षेत्रीय समिति की सदस्य बताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इसे बड़ी कामयाबी मान रही हैं, क्योंकि नरहरि लंबे समय से फरार चल रहा था और कई बड़ी घटनाओं में उसका नाम सामने आ चुका था।
महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी नक्सलियों ने छोड़ा हथियार
इधर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में इनामी नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है। गढ़चिरौली जिले में 11 और कांकेर में चार नक्सलियों ने पुलिस अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया। इन सभी पर कुल मिलाकर करोड़ों रुपये का इनाम घोषित था।
गढ़चिरौली में पुलिस महानिदेशक Rashmi Shukla की मौजूदगी में 11 नक्सलियों ने हथियार डाले। इनमें कई ऐसे नाम शामिल हैं जो लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे और कई घटनाओं में वांछित बताए जा रहे थे।
वहीं कांकेर जिले में भी चार इनामी नक्सलियों ने सरेंडर किया। इनमें काजल उर्फ रजीता वेड़दा, मंजूला उर्फ लक्ष्मी पोटाई, विलास उर्फ चैतु उसेंडी और रामसाय उर्फ लखन मर्रापी शामिल हैं।
अब तक हजारों नक्सली छोड़ चुके हैं संगठन
अधिकारियों के मुताबिक माओवादी विचारधारा से बढ़ती निराशा के कारण बड़ी संख्या में नक्सली अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक नक्सली को पुनर्वास योजना के तहत 50-50 हजार रुपये की तत्काल सहायता भी दी गई है।
आंकड़ों के अनुसार पिछले दो वर्षों में केवल छत्तीसगढ़ में ही 2380 से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जबकि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 2022 से अब तक 146 कट्टर नक्सलियों ने हथियार छोड़ दिए हैं।


