संपत्ति बचाने कोर्ट ने एसडीएम को बनाया रिसीवर, फिर भी जमीन का हो गया बंदरबांट.. मठ मंदिरो की जमीन बचाने में कलेक्टर-एसडीएम नाकाम।

स्वतंत्र बोल
रायपुर 22 जून 2025.  राजधानी में मठ मंदिरो के जमीनों को सुनियोजित तरीके से बेचा, ख़रीदा और कब्जा किया जा रहा हैं। ठाकुर रामचंद्र स्वामी नागरीदास मंदिर ट्रस्ट के रायपुर बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित साढ़े 11 एकड़ खेती की जमीन को अघोषित रूप से बेचने की तैयारी की जा रही है। चरौदा स्थित जमीन को एक ट्रांसपोर्टर ने पार्किंग यार्ड बनाकर कब्जा कर लिया है। इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है।

जानकारी अनुसार जिस जमीन को ट्रासंपोर्ट कम्पनी का कब्ज़ा है उस पर पहले खेती हुआ करती थी, चरौदा के किसान रेघ में लेकर खेती करते थे, फिर अचानक ट्रांसपोर्टर ने मुरम मिट्टी डालकर चारो तरफ बॉउंड्रीवाल बना दिया, किसानो ने इसकी जानकारी ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी को दी उन्होंने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। बाद में उसी जमीन को ट्रांसपोर्टर को लीज में देने वरिष्ठ कोंग्रेसी नेता सत्यनारायण शर्मा ने पंजीयक सार्वजनिक न्यास को आवेदन दिया कि “खेती से होने वाली आय से दुगुना लाभ मंदिर ट्रस्ट होगा, ऐसे में ट्रांसपोर्टर को जमीन 30 वर्षो के लीज पर दिया जाए।”

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ट्रस्ट भंग, एसडीएम रिसीवर-

ठाकुर रामचंद्र स्वामी नागरीदास मंदिर ट्रस्ट साल 2014 से कोर्ट के आदेशों के बाद भंग हो गया है। तत्कालीन न्यायधीश ने ट्रस्ट में जारी भर्राशाही और फर्जीवाड़ा को रोकने के लिए ट्रस्ट को भांग कर एसडीएम रायपुर को रिसीवर नियुक्त किया है, जिसके बाद एसडीएम की पूरी जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था देखने की है। मंदिर में सालाना होने वाले अनेको धार्मिक आयोजनों पर लाखो रुपये खर्च होता है, मंदिर के रखरखाव और भोग प्रसाद के लिए प्रत्येक महीने लाखो रुपये रिसीवर के दस्तखत से जारी होता है। एसडीएम में कार्यो की अधिकता के चलते रायपुर तहसीलदार को मंदिर ट्रस्ट का रिसीवर बनाया है, जिसके दस्तखत से राशि जारी होती है। ट्रांसफर होने तक तत्कालीन तहसीलदार पवन कोसमा मंदिर ट्रस्ट के रिसीवर थे । सबसे बड़ा आश्चर्य है कि लंबे समय से ट्रस्ट भांग होने और रिसीवर नियुक्ति के बाद भी कांग्रेसी नेता सत्यनारायण शर्मा ने स्वयं को वरिष्ठ ट्रस्टी बताकर जमीन लीज में देने आवेदन किया और पंजीयक सार्वजानिक न्यास ने कोई आपत्ति नहीं की। जिस पंजीयक सार्वजानिक न्यास की जिम्मेदारी मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन और सम्पत्ति को सुरक्षित रखने की है, उनको अपने अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी नहीं है। एसडीएम के इश्तहार पर आधा दर्जन लोगो ने आपत्ति की तब जाकर धरसींवा तहसीलदार से प्रतिवेदन मंगाया है।

फर्जीवाड़ा रोकने में कलेक्टर, एसडीएम नाकाम-

मठ मंदिरो के सम्पत्ति और जमीनों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है पंजीयक सार्वजानिक न्यास की है, पर राजधानी में दुर्भाग्य है पंजीयक सार्वजनिक न्यास के पास इसके लिए समय नहीं है। मठ -मंदिरो की जमीनों पर भूमाफिया बलपूर्वक कब्ज़ा कर रहे, फर्जी दस्तावेजों से जमीने बिक रही और पंजीयक सार्वजानिक न्यास मौन है। जैतूसाव मठ की दतरेंगा स्थित साढ़े 17 एकड़ जमीन तत्कालीन तहसीलदार अजय चंद्रवंशी ने फर्जी किसानो को नामांतरण कर दिया, जबकि शिकायतकर्ता के तथ्यों पर रजिस्ट्री की जाँच एसडीएम को करना था पर ऐसा नहीं किया गया और तत्कालीन तहसीलदार अजय चंद्रवंशी के आदेशों पर एसडीएम ने किसी भी प्रकार के रोक लगाने से इंकार कर दिया और किसान के नाम जमीन नामांतरण हो गया। नागरीदास मंदिर ट्रस्ट के चरौदा स्थित जमीन पर दो सालो से कब्ज़ा कर पार्किंग यार्ड बनाया गया है, जिस पर जाँच के नाम पर प्रशासन केवल खानापूर्ति कर रहा है। एसडीएम नंदकुमार चौबे ने 5 अप्रेल तक धरसींवा तहसीलदार से चरौदा स्थित जमीन और दतरेंगा की जमीनों के लिए रायपुर तहसीलदार से का  प्रतिवेदन मंगाया था जो ढाई महीने बाद भी नहीं पहुंचा है।

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