मठ की जमीन में खेला: SDM ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता सत्यनारायण शर्मा सहित छह को जारी किया नोटिस, उधर SSP से शिकायत

स्वतंत्र बोल
रायपुर 27 जून 2025.  ठाकुर रामचंद्र स्वामी जैतूसाव मठ के दतरेंगा स्थित साढ़े 17 एकड़ कृषि भूमि को अघोषित तौर पर किसान और बिल्डर को बेचने के मामले में जैतूसाव मठ के कथित ट्रस्टी फंस गए है। स्वयं को ट्रस्टी बताकर मठ की जमीनों का बंदरबांट करने वालो की शिकायत एसएसपी रायपुर से हुई तो दूसरी तरफ पंजीयक सार्वजानिक न्यास के पास कच्चा चिटठा पंहुचा है जिसके बाद पंजीयक सार्वजानिक न्यास ने सभी कथित ट्रस्टियो को नोटिस जारी कर 11 जुलाई तक जवाब मांगा है। दतरेंगा की कृषि भूमि को जैतूसाव मठ के कथित ट्रस्टियो ने प्रस्ताव पारित कर 62 लाख रुपये लेकर अघोषित तौर पर बेचा है। चर्चा है कि है इस सौदे में कुछ ट्रस्टियो को 3 करोड़ रुपये अलग से दिए गया है। इस मामले को स्वतंत्र बोल ने प्रमुखता से उठाता रहा है।

कलेक्टर की आँखों में पट्टी: मंदिर की जमीन बेचने तैयार किये फर्जी किसान, बक्शीशनामा का उल्लंघन कर बेचीं जा रही जमीनें.. छद्म नामो से रजिस्ट्री की तैयारी।

इन्हे जारी हुआ नोटिस-

पंजीयक सार्वजनिक न्यास/ एसडीएम ने वरिष्ठ कोंग्रेसी नेता सत्यनारायण शर्मा, राजे श्री महंत राम सुंदरदास, जगन्नाथ अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, रमेश यदु, सीताराम अग्रवाल, सुरेश शुक्ला सहित कुल सात लोगो को नोटिस जारी किया है, तय समय में जवाब नहीं देने पर एकपक्षीय कार्यवाही भी की जा सकेगी। इस नोटिस के बाद ट्रस्ट में हडकंप मचा हुआ है, सभी स्वयं को जैतूसाव मठ का ट्रस्टी बताते है पर ट्रस्ट पंजी सहित अन्य दस्तावेजों में विधिवत रूप से ट्रस्टी नहीं है। उसके बाद भी सभी एक राय होकर 22 अक्टूबर 2024 को बैठक कर दतरेंगा की जमीन से कब्ज़ा छोड़ने के एवज में 62 लाख रुपये पक्के में लिए और किसी भी प्रकार के क़ानूनी कार्यवाही नहीं करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया था। बैठक में राजे श्री महंत रामसुंदर दास, सत्यनारायण शर्मा, जगन्नाथ अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, रमेश यदु, सीताराम अग्रवाल, सुरेश शुक्ला, महेंद्र अग्रवाल, अजय तिवारी शामिल थे।

तहसीलदार से मांगा प्रतिवेदन-

जैतूसाव मठ के साढ़े 17 एकड़ कृषि भूमि (जिस पर अब तक खेती हो रही) को फर्जी पेपर तैयार कर 50 साल बड़ा दतरेंगा के कथित किसान ने अपने नाम नामांतरण कराया और जमीन अविनाश ग्रुप के बिल्डर सिंघनिया को बेच दिया । शुरुआत में ट्रस्ट प्रबंधन ने इसका विरोध किया बाद में पैसे लेकर समझौता कर लिया , जिसके बाद उक्त रजिस्ट्री को शून्य करने कलेक्टर से शिकायत हुई। कलेक्टर ने एसडीएम को जाँच और कार्यवाही करने लिखा है, जिस पर एसडीएम नंदकुमार चौबे ने तहसीलदार रायपुर से जाँच प्रतिवेदन माँगा है।

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