उच्च शिक्षा में अंधेर: डिप्टी रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार दोनों पदों पर नियुक्ति गलत, शासन ने किया स्वीकार.. पर कार्यवाही शून्य!

स्वतंत्र बोल
रायपुर 29 जनवरी 2025.  पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव शैलेन्द्र पटेल और उच्च शिक्षा विभाग कोर्ट-कोर्ट खेलकर कोर्ट का कीमती समय ख़राब कर रहे है। शैक्षणिक योग्यता में फर्जीवाड़ा, नियुक्ति में गड़बड़ी और अयोग्यता प्रमाणित होने के बाद भी अब तक उच्च शिक्षा विभाग शैलेन्द्र पटेल पर कार्यवाही नहीं कर पाया है। उधर उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी अप्रत्यक्ष तौर पर पटेल के साथ खड़े नजर आ रहे है। साल 2016 में शैलेन्द्र पटेल की सरकारी सेवा में पहली नियुक्ति बतौर उपकुलसचिव पद पर हुआ था, साल 2020 में उच्च शिक्षा विभाग की जाँच में स्पष्ट हुआ कि पटेल तत्कालीन में सीजीपीएससी द्वारा निर्धारित मापदंड ” 6000 ग्रैड पे में 09 वर्षो के अध्यापन” का अनुभव नहीं रखते.. उसके बाद भी उच्च शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने कार्यवाही नहीं की है। विगत ढाई वर्षो से संचालनालय और मंत्रालय के अधिकारी एक दूसरे से मार्गदर्शन और अभिमत मांग रहे है।

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ऐसे हो रहा कोर्ट के समय का दुरुपयोग-


साल 2020 में उपकुलसचिव की योग्यता को आधार बनाकर बैकडोर से कुलसचिव पद पर चयनित पटेल को भी उच्च शिक्षा विभाग ने अयोग्य माना है, उसके बाद भी भर्राशाही का आलम है कि उसे प्रदेश के सबसे बड़े विश्वविद्यालय का प्रभारी कुलसचिव की पोस्टिंग दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग के कई दौर की जाँच में फर्जी प्रमाणित हो चुके शैलेन्द्र पटेल ने अपने बचाव में हाईकोर्ट के महत्वपूर्ण समय का दुरुपयोग किया है। पटेल ने साल 31 अक्टूबर 2022 को उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कुलसचिव पद के चयन को निरस्त करने पर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल किया। कोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए अयोग्य व्यक्ति को चयन आदेश जारी कर “दोबारा जाँच करने” आदेशित किया। कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने तीसरी बार तीन प्राचार्यो की कमेटी बनाकर पटेल के शैक्षणिक योग्यता और अनुभव प्रमाण पत्रों की जाँच की, जिसमे कमेटी ने “पटेल को अयोग्य” पाया। इसी दौरान पटेल ने कुलसचिव चयन होने के बाद पोस्टिंग नहीं देने संबंधी याचिका उच्च न्यायालय में दाखिल किया तो फर्जी प्रमाणित होने के बाद भी उच्च शिक्षा विभाग ने पटेल को संचालनालय उच्च शिक्षा विभाग में पोस्टिंग दी। पटेल ने डायरेक्ट्रेड ज्वाइन करने की बजाये उच्च शिक्षा विभाग को एक बार फिर हाईकोर्ट में खड़ा कर दिया कि  “उच्च शिक्षा विभाग को नियमानुसार डायरेक्ट्रेड में पोस्टिंग करने का अधिकार नहीं है।” इस पर उच्च शिक्षा विभाग ने शपथ पत्र स्वीकार किया कि पटेल कई दौर की जाँच में अयोग्य पाया गया है, कुलसचिव के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता को पूरा नहीं करता और उच्च शिक्षा विभाग नियोक्ता है, ऐसे में वह अपने मातहत किसी भी कर्मचारी और अधिकारी को पोस्टिंग कर सकता है।”

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कोर्ट ने लगाया फटकार-


उच्च शिक्षा विभाग के जवाब पर कोर्ट के सिंगल बेंच ने पटेल को डायरेट्रेड ज्वाइन करने निर्देशित करते हुए फटकार लगाया था। कोर्ट ने फटकारते हए कहा था कि “आप कोर्ट को गुमराह कर रहे, वेतन कही से भी मिले.. आप डायरेट्रेड ज्वाइन कीजिये” और कोर्ट ने डायरेट्रेड में कुलसचिव पद में चयन हेतु जारी किया गया निरस्त कर दिया। कोर्ट के इस आदेश पर पटेल ने संचालनालय में जॉइन नहीं कर सिंगल बेंच के फैसले को डबल बेंच में चुनौती दी। डीबी ने पटेल के प्रकरण का तीन सप्ताह में निराकरण के करने निर्देशित कर केस डिस्पोज कर दिया और साथ में कुलसचिव पद पर संचालनालय के जॉइनिंग आदेश को स्थगन दिया।

नियमानुसार नियुक्ति आदेश जारी होने के एक महीने के भीतर ज्वाइन नहीं करने पर चयन स्वतः ही निरस्त हो जाता है। पटेल को कुलसचिव पद पर जॉइनिंग करने उपकुलसचिव पद से इस्तीफा देना पड़ता, और कुलसचिव पद पर नियुक्ति निरस्त होने पर वेटिंग कैंडिडेट नरेश चन्दन को मौका मिलता.. इन दोनों से बचने पटेल ने कोर्ट में पिटीशन-पिटीशन खेल कर कोर्ट का महत्वपूर्ण समय ख़राब किया है। यहाँ सबसे महत्वपूर्ण है कि पटेल को केस के निराकरण होते तक तक कुलसचिव पद पर हुए चयन को निरस्त नहीं होने से राहत मिला है,, ना की प्रभारी कुलसचिव बनाकर विश्वविद्यालय चलाने की छूट मिली है। डीबी द्वारा तीन सप्ताह के भीतर केस का निराकरण करने के आदेश पर चार महीनो बाद सितंबर 2024 में सुनवाई हुई जिसमे पटेल के वकील ने रिजॉइंडर फाइल करने समय मांगा, जिससे केस चार महीना और आगे खींच गया। केस की सुनवाई 14 जनवरी 2025 को हुई तो उच्च शिक्षा विभाग के वकील को केस का फाइल नहीं मिला, तो केस दो सप्ताह के लिए आगे बढ़ गया। जिसके बाद समझा जा सकता है कि भ्रष्ट और अयोग्य प्रमाणित कर्मचारी कोर्ट के कीमती समय का दुरुपयोग स्वयं को बचाने कर रहा और उच्च शिक्षा विभाग के जिम्मेदार उसके सहयोगी बने हुए है।

मूलतः उपकुलसचिव शैलेन्द्र पटेल को साल 25-05-2022 को तत्कालीन कुलपति डॉ केसरीलाल वर्मा ने कुलसचिव का प्रभार दिया था, ना की शासन ने नियुक्ति की है।

 

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