महिला आरक्षण विवाद के पीछे कौन छुपा है असली खेल, रंजीत रंजन के आरोपों से मचा सियासी भूचाल

स्वतंत्र बोल अप्रैल
रायपुर 21 अप्रैल 2026: रायपुर में महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे को लेकर सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर बनी स्थिति के बाद अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस बीच कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।

कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय रायपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में रंजीत रंजन ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनकी आपत्ति परिसीमन बिल की प्रक्रिया और उसके समय को लेकर है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं और पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है।

रंजीत रंजन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण को 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक देश में जनगणना पूरी नहीं होती, तब तक परिसीमन कैसे संभव है। उनके अनुसार बिना जनगणना के परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं है और इससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार का रवैया महिला सशक्तिकरण के प्रति स्पष्ट नहीं है और इस पूरे मामले में राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।

दूसरी ओर, रायपुर में ही सोमवार को महिला आरक्षण मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए जनाक्रोश रैली निकाली थी। इस रैली में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए थे। भाजपा ने आरोप लगाया था कि बिल को गिराने की जिम्मेदारी कांग्रेस की है।

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने भाजपा के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक छलावा बताया और कहा कि जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दोनों दलों के बीच यह टकराव आखिर किस दिशा में जाएगा और इसके पीछे की असली राजनीतिक रणनीति क्या है, जिस पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।