क्या सच में एसडीएम अपनी लॉगिन आईडी दूसरों को दे रहे थे? निर्वाचन आयोग की नई गाइडलाइन में क्या है खास?

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स्वतंत्र बोल
लखनऊ 30 अक्टूबर 2026:
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर मचे सियासी घмаसान के बीच निर्वाचन आयोग ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव द्वारा एसडीएम की लॉगिन आईडी बीजेपी कार्यकर्ताओं को दिए जाने और सपा समर्थकों के वोट काटे जाने के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के कामों में अब किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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आईडी, पासवर्ड और ओटीपी साझा करने पर सख्त रोक

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की ओर से जारी नए निर्देशों के तहत अधिकारियों को अपनी यूजर आईडी, लॉगिन पासवर्ड और ओटीपी किसी भी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा करने से सख्त मना किया गया है। निर्वाचन प्रक्रिया में क्रेडेंशियल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DM) को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना अपने डीईओ लॉगिन से ईसीआई नेट पर खुद लॉगिन करें और मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की समीक्षा करें। किसी भी जिले में अनावश्यक रूप से आवेदन लंबित मिलने या निगरानी में लापरवाही पाए जाने पर सीधे संबंधित डीएम की जवाबदेही तय होगी।

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ईआरओ से लेकर बीएलओ तक के कामकाज की होगी जांच

नए आदेशों के अनुसार, एसडीएम, ईआरओ, एईआरओ, बीएलओ सुपरवाइजर और बीएलओ की प्रोफाइल में दर्ज विवरणों की जांच की जाएगी और उनके अंतिम लॉगिन की प्रतिदिन समीक्षा होगी। फॉर्म-6, 6ए, 7 और 8 के पेंडिंग आवेदनों का समय पर निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। गलत अधिकारियों को भेजे गए आवेदनों को तुरंत सही जगह री-असाइन करना होगा। इसके अलावा, मतदाता सूची और ईपिक से जुड़ी शिकायतों के वास्तविक समाधान के लिए डीएम को साप्ताहिक समीक्षा बैठकें करने को कहा गया है।

बीएलओ की लापरवाही पर भी एक्शन

मतदाताओं के लिए शुरू की गई ‘बुक ए कॉल विद बीएलओ’ सेवा को लेकर भी आयोग ने सख्ती बरती है। नागरिकों की कोई भी कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक समय तक लंबित नहीं रहनी चाहिए। बिना संपर्क किए ही ‘संपर्क हुआ’ (Contacted) या ‘उपलब्ध नहीं’ (Unavailable) का विकल्प चुनने वाले बीएलओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।