स्वतंत्र बोल
बिलासपुर, 18 मई 2026:शादी के सिर्फ दो साल बाद बंद कमरे में हुई नवविवाहिता की रहस्यमयी मौत का मामला आखिरकार 18 साल बाद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पत्नी की हत्या के आरोपी पति ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।
यह मामला वर्ष 2007 का है, जब ममता रजक नाम की नवविवाहिता की ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उस समय मामला आत्महत्या या हादसे जैसा दिखाने की कोशिश हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी बदल दी।
डॉक्टरों ने साफ बताया था कि मृतका के शरीर पर चोट के निशान थे और उसकी मौत गला घोंटने से हुई थी। इसके बाद चकरभाटा पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
हालांकि वर्ष 2010 में निचली अदालत ने तकनीकी संदेहों का लाभ देते हुए आरोपी पति दीपनारायण रजक समेत अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन और मृतका के पिता ने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की युगलपीठ ने 8 अक्टूबर 2025 को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि चूंकि महिला अपने पति के साथ रह रही थी, इसलिए साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत घटना की परिस्थितियां स्पष्ट करने की जिम्मेदारी पति की थी, लेकिन वह ऐसा करने में पूरी तरह विफल रहा।
इसके बाद हाई कोर्ट ने आरोपी पति दीपनारायण रजक को उम्रकैद और 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई थी। साथ ही एक महीने के भीतर आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए गए थे।
आरोपी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी को सरेंडर करने का आदेश दे दिया।
कोर्ट के निर्देश के बाद 12 मई को आरोपी पति ने जिला न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
करीब दो दशक पुराने इस मामले में अब जाकर मृतका के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। वहीं इस फैसले को ऐसे मामलों में अहम कानूनी संदेश माना जा रहा है, जहां बंद कमरे में हुई मौतों के पीछे की सच्चाई अक्सर दब जाती है।


