नोएल टाटा के विरोध के बावजूद फिर टाटा संस के चेयरमैन बने एन. चंद्रशेखरन, जानिए बोर्ड मीटिंग में क्या-क्या हुआ

स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 17 सितंबर 2026:
एन. चंद्रशेखरन को अगले 5 साल के लिए फिर से टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। टाटा ग्रुप के बोर्ड मेंबर्स की बैठक में नोएल टाटा को छोड़कर बाकी सभी सदस्यों ने चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट के पक्ष में वोट दिया, जबकि नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। बोर्ड की मंजूरी के बाद अब चंद्रशेखरन अगले पांच वर्षों तक इस पद पर बने रहेंगे।

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यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब पिछले महीने ही चंद्रशेखरन ने चेयरमैन पद से इस्तीफे का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि ग्रुप की लीडरशिप को लेकर स्पष्टता नहीं है, जबकि स्पष्टता होनी बहुत जरूरी है, इसलिए वे आगे इस पद पर नहीं बने रहना चाहते हैं। वहीं, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ने नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक का कारोबार करने वाली होल्डिंग कंपनी टाटा संस को पब्लिक करने (शेयर बाजार में लिस्ट कराने) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

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चंद्रशेखरन ने इस्तीफे पर क्या कहा था?

एक महीने पहले दोबारा चेयरमैन न बनने के फैसले की घोषणा करते हुए चंद्रशेखरन ने बताया था कि फरवरी में हुई बोर्ड बैठक के दौरान टाटा संस के एक सदस्य ने उनके 5 साल के कार्यकाल के विस्तार का समर्थन नहीं किया था। हालांकि, बोर्ड बैठक से पहले सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल विस्तार की सिफारिश की थी। चंद्रशेखरन के अनुसार, लगभग 6 महीने बीत जाने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला, जबकि रणनीतिक परियोजनाओं के नाजुक दौर में लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना आवश्यक है।

नोएल टाटा की चिंता और सत्ता का संघर्ष

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से यह आश्वासन मांगा था कि होल्डिंग कंपनी पर बढ़ते नियामकीय दबाव के बावजूद टाटा संस शेयर बाजार में लिस्ट नहीं होगी। इसके साथ ही उन्होंने ग्रुप की कर्ज स्थिति को लेकर भी चिंता जताई थी। चंद्रशेखरन के इस्तीफे का कारण बने सत्ता संघर्ष के केंद्र में टाटा ट्रस्ट्स है, जिसके पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है और समूह पर उसका गहरा प्रभाव है।

कई इस्तीफे और एजीएम पर अनिश्चितता

मौजूदा नेतृत्व की अनिश्चितता के बीच रतन टाटा से जुड़े कई प्रमुख नेता, जिनमें विजय सिंह और मेहली मिस्त्री शामिल हैं, पहले ही अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। इन सब घटनाक्रमों के बीच, सर रतन टाटा ट्रस्ट्स द्वारा बैठक के लिए अपने प्रतिनिधि नामित न कर पाने के कारण कोरम की कमी हो गई है, जिससे टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) अधर में लटकी हुई है।