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नई दिल्ली 16 सितंबर 2026. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में भारत के वस्तु निर्यात में 26 प्रतिशत (26.12%) की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वैश्विक बाजार की चुनौतियों के बावजूद अगस्त 2025 में दर्ज 34.74 अरब डॉलर के मुकाबले इस बार कुल निर्यात बढ़कर 43.81 अरब डॉलर तक पहुंच गया। निर्यात में आई इस अचानक तेजी की मुख्य वजह अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों पर लगने वाली ड्यूटी में कटौती और घरेलू मुद्रा रुपये में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट को माना जा रहा है।
अमेरिका में टैरिफ में कटौती और रुपये की गिरावट का फायदा
पिछले साल अमेरिका ने अगस्त 2025 की शुरुआत में 25 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ और 27 अगस्त तक रूसी तेल आयात के मुद्दे पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे भारतीय निर्यातकों को 50 प्रतिशत तक ड्यूटी चुकानी पड़ रही थी। इस साल अमेरिका में भारतीय सामानों पर शुल्क घटकर महज 10 प्रतिशत रह गया है। इसके चलते अगस्त में अमेरिका को होने वाला निर्यात 21 प्रतिशत से अधिक की छलांग लगाकर 6.8 अरब डॉलर से बढ़कर 8.3 अरब डॉलर हो गया, जो इस कैलेंडर वर्ष में वाशिंगटन के लिए सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।
इसके साथ ही, रुपये की कीमत में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आने से भारतीय सामान विदेशी बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बने हैं। एचएसबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर एक्सपोर्ट में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाले मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और ट्रांसपोर्ट से जुड़े हाई-टेक उत्पादों की मांग में पिछले दो से तीन तिमाहियों में सबसे तेज उछाल आया है। इसके अलावा, समुद्री उत्पादों और खाद्य पदार्थों जैसे लो-टेक एक्सपोर्ट ने भी ठीक-ठाक प्रदर्शन किया है, जबकि टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे मिड-टेक एक्सपोर्ट पर इस गिरावट का विशेष असर नहीं पड़ा है।
हाई-टेक उत्पाद और ऑटोमोबाइल चमके, लेबर इंटेंसिव सेक्टर्स दबाव में
अप्रैल से जून तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, इंजीनियरिंग गुड्स में 18.1 प्रतिशत, इलेक्ट्रॉनिक्स में 22.6 प्रतिशत और फार्मास्यूटिकल्स में 6.8 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। ऑटोमोबाइल निर्यात में भी 22.2 प्रतिशत की मजबूत ग्रोथ दर्ज हुई, जिसमें दोपहिया और तिपहिया वाहनों का दबदबा रहा। वहीं जेम्स एंड ज्वेलरी का निर्यात 3.14 प्रतिशत बढ़कर 2.30 अरब डॉलर पहुंच गया। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एस सी राल्हन के अनुसार, 26.12 प्रतिशत की यह वृद्धि भारतीय निर्यातकों की क्षमता दर्शाती है। चीन, सिंगापुर, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, तंजानिया, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और श्रीलंका जैसे बाजारों में भारतीय सामानों की पहुंच बढ़ी है।
दूसरी ओर, ज्यादा श्रम वाले (लेबर इंटेंसिव) और कम मार्जिन वाले सेक्टर्स पर दबाव बना हुआ है। टेक्सटाइल निर्यात में 12.4 प्रतिशत और चमड़ा उत्पादों में 4.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके अलावा फल, सब्जियां, सिरेमिक्स, ग्लासवेयर और जूट का निर्यात भी प्रभावित रहा है। चाय के निर्यात में सबसे ज्यादा 17.5 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिली है। कुल 31 एक्सपोर्ट सेक्टर्स में से 11 ने इस तिमाही में गिरावट दर्ज की है।
सोने के आयात में भारी कमी, व्यापार घाटे में सुधार
निर्यात में तेजी के साथ-साथ आयात के मोर्चे पर भी राहत की खबर आई है। चालू वित्त वर्ष में पहली बार सोने के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अगस्त 2025 में हुए 5.44 अरब डॉलर के सोने के आयात के मुकाबले इस साल अगस्त में यह घटकर आधा यानी महज 2.30 अरब डॉलर रह गया। सोने का आयात घटने से कुल वस्तु आयात की वृद्धि दर धीमी होकर 14.05 प्रतिशत रही और यह 70.67 अरब डॉलर तक पहुंचा।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, आयात की वृद्धि दर निर्यात से कम रहने के कारण देश के व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिली है। देश का व्यापार घाटा 27.20 अरब डॉलर से घटकर 26.86 अरब डॉलर पर आ गया है। वहीं आयात के मोर्चे पर पेट्रोलियम, ऊर्जा उत्पादों और औद्योगिक इनपुट्स की मांग घरेलू उत्पादन की आवश्यकताओं को पूरा कर रही है।


