बाजार में ₹70 तो सरकारी आउटलेट पर ₹35 किलो प्याज: जानिए एक साल में क्यों दोगुने हो गए दाम और कहां मिल रही राहत

स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 17 सितंबर 2026:
 देशभर के खुदरा बाजारों में प्याज की कीमतें ₹60 से ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जिसने आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। हालांकि, केंद्र सरकार बफर स्टॉक से नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन (NCCF), नैफेड (NAFED), केंद्रीय भंडार और मोबाइल वैन के जरिए सिर्फ ₹35 प्रति किलो के भाव पर प्याज बेच रही है। बफर स्टॉक की यह बिक्री 24 अगस्त से शुरू की गई है, लेकिन उत्पादक राज्यों से खपत केंद्रों तक प्याज पहुंचाने की चुनौतियों के कारण यह हर बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है। इसी वजह से सरकारी और खुले बाजार के दामों में करीब दोगुने का अंतर बना हुआ है।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 16 सितंबर को देशभर में प्याज का औसत खुदरा भाव ₹53.84 प्रति किलो दर्ज किया गया। ठीक एक साल पहले इसी तारीख को यह औसत कीमत ₹27.71 प्रति किलो थी, यानी एक साल में प्याज लगभग 94 फीसदी महंगी हो चुकी है। वहीं 16 सितंबर को मंडियों में प्याज का औसत थोक भाव ₹45.65 प्रति किलो रहा, जिससे स्पष्ट है कि मंडी से लेकर खुदरा बाजार तक कीमतों का दबाव बना हुआ है।

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19 शहरों तक सप्लाई बढ़ाने की कोशिश

बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज की सप्लाई का दायरा बढ़ाकर 19 शहरों तक कर दिया है। इसके लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’, रेलवे रैक और 30 से ज्यादा ट्रकों का इस्तेमाल कर प्याज भेजा जा रहा है। सरकार का कहना है कि कुछ बाजारों में बफर प्याज की बिक्री का असर दिखना शुरू हुआ है। हालांकि, आम लोगों को असली राहत तभी मिलेगी जब ₹35 किलो वाली सरकारी प्याज अधिक से अधिक बाजारों में आसानी से मिलने लगेगी।

क्यों बढ़ रहे हैं प्याज के दाम?

प्याज महंगा होने की मुख्य वजह रबी सीजन का स्टॉक धीरे-धीरे खत्म होना और नई खरीफ फसल आने में समय लगना है। सितंबर से दिसंबर के इस लीन सीजन में हर साल कीमतें बढ़ती हैं, इसलिए बफर स्टॉक से सप्लाई बढ़ाई जाती है। इस बार खरीफ फसल की बुआई में हुई देरी ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। जुलाई में नासिक (महाराष्ट्र) में बुआई करीब 15 दिन पीछे चल रही थी, जबकि चित्रदुर्गा-चलकेरे (कर्नाटक) में बुआई सामान्य स्तर की करीब 60 फीसदी ही दर्ज की गई थी।

मौसम और सट्टा खरीदारी का असर

मौसम और बाजार के माहौल ने भी कीमतों में तेजी लाने का काम किया है। मॉनसून में देरी और उससे बने हालात का असर प्याज की उपलब्धता पर पड़ा। इसके साथ ही सरकार के अनुसार कुछ कारोबारियों द्वारा की गई सट्टा खरीदारी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया, जिससे असली सप्लाई मौजूद होने के बावजूद कीमतों में उछाल आया।

देश में उत्पादन पर्याप्त, वितरण बनी चुनौती

सरकार के मुताबिक देश में प्याज की कुल उपलब्धता में कमी नहीं है। वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है। जुलाई के आकलन में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में पर्याप्त स्टॉक था। सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 2 लाख टन रबी प्याज बफर में रखने का लक्ष्य तय किया है, जिसमें से 1.21 लाख टन की खरीद हो चुकी है। इसके लिए खरीद भाव ₹1,875 से बढ़ाकर ₹2,125 प्रति क्विंटल (करीब ₹21.25 प्रति किलो) कर दिया गया है।