स्वतंत्र बोल
नई दिल्ली 03 फरवरी 2025. प्रयागराज महाकुंभ में 30 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान के दौरान हुई भगदड़ को सुप्रीम कोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया, लेकिन इस घटना पर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. अदालत ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया, जहां पहले से ही इस मामले में एक याचिका लंबित है.
क्या थी याचिका की मांग?
भगदड़ की इस घटना के बाद अधिवक्ता विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी. यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई थी और इसमें अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत श्रद्धालुओं की सुरक्षा की गारंटी की मांग की गई थी.
क्या हुआ था महाकुंभ में?
प्रयागराज के संगम क्षेत्र में मौनी अमावस्या स्नान के दौरान 30 जनवरी को मची भगदड़ में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक श्रद्धालु घायल हुए थे. यह हादसा तड़के हुआ, जब लाखों की संख्या में श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाने पहुंचे थे.


